-बिहार में सियासी सरगर्मी तेज, 14 अप्रैल पर टिकी सबकी नजर
पटना। दीपक तिवारी।बिहार की राजनीति इन दिनों खामोशी के पीछे छिपे बड़े बदलाव के संकेत दे रही है। मुख्यमंत्री Nitish Kumar के हालिया दिल्ली दौरे, राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ और उसके बाद अचानक तेज हुई राजनीतिक गतिविधियों ने सत्ता परिवर्तन की अटकलों को हवा दे दी है। खासकर 14 अप्रैल को संभावित इस्तीफे की चर्चा ने सियासी माहौल को गरमा दिया है।
दिल्ली में 10 अप्रैल को शपथ ग्रहण के दौरान उपमुख्यमंत्री Samrat Choudhary भी उनके साथ मौजूद थे। हालांकि पटना लौटने के बाद सम्राट चौधरी के व्यवहार में बदलाव देखने को मिला। आमतौर पर सक्रिय रहने वाले चौधरी करीब 24 घंटे तक सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहे और Jyotirao Phule जयंती जैसे महत्वपूर्ण आयोजन में भी शामिल नहीं हुए।
सियासी गलियारों में इस खामोशी को लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने अपने नेताओं को फिलहाल लो प्रोफाइल रहने का निर्देश दिया है, जब तक नई सरकार की स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि सम्राट चौधरी को संभावित मुख्यमंत्री के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि पार्टी के भीतर आम सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है।

इधर, Nitish Kumar और Samrat Choudhary की मुलाकात के तुरंत बाद उपमुख्यमंत्री Vijay Sinha का राजभवन पहुंचना घटनाक्रम को और रहस्यमय बना देता है। माना जा रहा है कि नई सरकार के गठन की रूपरेखा लगभग तैयार है।
दिल्ली में भाजपा कोर कमेटी की प्रस्तावित बैठक का अचानक रद्द होना भी कई संकेत दे रहा है। बिहार प्रभारी Vinod Tawde की सक्रियता और नेताओं से लगातार मुलाकातें इस ओर इशारा कर रही हैं कि पार्टी किसी बड़े फैसले के करीब है।
वहीं, भाजपा कार्यालय के बाहर सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग वाला पोस्टर लगना और फिर तुरंत हट जाना सियासी माहौल में एक और ट्विस्ट जोड़ता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम किसी रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है।
एक बात स्पष्ट है कि Narendra Modi और Amit Shah के निर्णयों के बाद पार्टी में विरोध की संभावना कम ही रहती है। ऐसे में अब सबकी नजरें 14 अप्रैल पर टिकी हैं, जब बिहार की राजनीति एक नया मोड़ ले सकती है।












