-बिहार में नई सरकार गठन की रफ्तार तेज, 20 नवंबर को नीतीश कुमार लेंगे दसवीं बार शपथ
दीपक कुमार तिवारी।पटना।
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की प्रचंड जीत के बाद राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। लंबे चुनावी अभियान और परिणामों के बाद अब सत्ता हस्तांतरण का औपचारिक दौर शुरू हो चुका है। इसी क्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मुलाकात कर विधानसभा भंग करने की अनुशंसा का पत्र सौंपा।
इससे पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य कैबिनेट की अंतिम बैठक हुई, जिसमें 19 नवंबर को विधानसभा भंग करने का निर्णय सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसके साथ ही नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
नई सरकार की तैयारी को लेकर गठबंधन के भीतर बैठकों का दौर भी शुरू हो गया है। मंगलवार को जदयू और भाजपा दोनों के विधायक दल की बैठकें आयोजित होंगी। इन बैठकों में नई सरकार के नेतृत्व और महत्वपूर्ण मंत्रिपदों के बंटवारे को लेकर चर्चा होगी। दोनों दलों की आंतरिक सहमति के बाद एनडीए की संयुक्त बैठक में औपचारिक रूप से नेता का चयन किया जाएगा।
लगभग तय माना जा रहा है कि नीतीश कुमार 20 नवंबर को एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। यह उनके राजनीतिक करियर का अहम पड़ाव होगा, क्योंकि वे दसवीं बार सत्ता की बागडोर संभालने जा रहे हैं। शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में किया जाएगा, जहां तैयारियाँ युद्धस्तर पर जारी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति भी संभावित बताई जा रही है, जिससे समारोह का महत्व और बढ़ गया है।
इधर, नई कैबिनेट के स्वरूप पर भी चर्चा तेज है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने जानकारी दी है कि नई सरकार में कुल 36 मंत्री होंगे—जिनमें 16 भाजपा, 15 जदयू, 3 लोजपा (रामविलास), 1 हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा और 1 रालोसपा-लोकमोर्चा से शामिल होंगे। यह गठन एनडीए के भीतर संतुलन और सभी घटक दलों की भागीदारी को दर्शाता है।

चुनाव आयोग ने सभी विजयी उम्मीदवारों की सूची राज्यपाल को सौंप दी है, जिसके साथ ही आदर्श आचार संहिता समाप्त हो गई है। मौजूदा सरकार का कार्यकाल 22 नवंबर को समाप्त हो रहा है, इसलिए 20 नवंबर को शपथ ग्रहण कार्यक्रम समयसीमा के अनुरूप है।
एनडीए की ऐतिहासिक जीत ने राज्य की राजनीति को नया संदेश दिया है। जनता ने स्थिरता, विकास और सुशासन पर आधारित नेतृत्व में फिर भरोसा जताया है। हालांकि नई सरकार के सामने बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचा विकास जैसी कई चुनौतियाँ होंगी।
उधर, शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियाँ भी पूरी ताकत से जारी हैं। सुरक्षा व्यवस्था से लेकर मंच निर्माण और यातायात प्रबंधन तक की योजनाएँ अधिकारियों द्वारा अंतिम रूप दी जा रही हैं। बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की मौजूदगी को देखते हुए विशेष व्यवस्था की जा रही है।
19 नवंबर को विधानसभा भंग होने और 20 नवंबर को नई सरकार के गठन के साथ बिहार में राजनीतिक गतिविधियाँ चरम पर हैं। अब राज्य की निगाहें नवगठित सरकार पर टिकी हैं कि वह जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।













