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पहली दफे…नन-गजटेड पर भी रही ‘मंत्री’ की नजर !

-अजब-गजब का खेलः पहली दफे…नन-गजटेड पर भी रही ‘मंत्री’ की नजर !

-जून माह में बहती गंगा में जमकर हाथ धोया,

-‘नियोक्ता'(अफसर) की रडार पर होंगे कई सरकारी सेवक

सम्वाददाता। पटना।

जून महीने में विभागों के अंदर अजब-गजब का खेल हुआ है. कहीं मंत्री भारी तो कहीं अफसर. एक विभाग में जहां कड़क अफसर के आगे मंत्री जी मंशा पर पानी फिर गया. वहीं एक दूसरे मालदार विभाग में इस बार मंत्री व उनका कुनबा बहती गंगा में जमकर हाथ धोया. जानकार बताते हैं कि इस बार जून महीने में हाल के वर्षों में जो नहीं हुआ था वो हुआ. यानि विभाग के दूसरे नंबर के सबसे बड़े आईएएस अफसर को बाईपास कर खेल खेला गया. नन गजटेड सरकारी सेवकों के ट्रांसफऱ में भी मंत्री व उनके कुनबे की खूब चली. जो सेवा से बाहर थे, उनकी जबरदस्त और मनचाही जगह पर इंट्री हुई.

हर साल जून महीने में सरकारी अधिकारियों-कर्मियों का ट्रांसफर-पोस्टिंग किया जाता है. जो अधिकारी-कर्मी एक जगह पर तीन साल का कार्यकाल पूरा कर लेते हैं, उन्हें स्थानांतरित कर दूसरे जगह पर पोस्टिंग की जाती है. सूबे में यह व्यवस्था लागू है कि जून महीने में गजटेड अधिकारियों का स्थानांतरण मंत्री स्तर से, वहीं नन गजटेड का निदेशालय/आयुक्त स्तर से स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जाती है. विभागीय जानकार बताते हैं कि इस बार एक मलाईदार विभाग में उल्टा खेल हुआ है. यानि गजटेड के साथ-साथ नन गजटेड सरकारी सेवकों का भी मंत्री स्तर से ही ट्रांसफऱ की प्रक्रिया पूरी की गई है. जबकि इसके पहले साल तक नन गजटेड इन सरकारी सेवकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया आयुक्त/निदेशालय के स्तर से पूरी की जाती थी. इस बार केंद्र बिंदु मंत्री के स्तर पर था. यानि एक आईएएस अफसर को बाईपास कर दिया गया. विभाग के अंदर इसकी बड़ी चर्चा है. आखिर ऐसा क्यों….?

जानकार बताते हैं कि इस बार मालदार विभाग में उल्टी गंगा बहाई गई है. निरीक्षकीय स्तर के सरकारी सेवकों के स्थानांतरण में भी वजीर का कूदना चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, अब तक इस संवर्ग का स्थानांतरण-पदस्थापन की कार्रवाई नियोक्ता के स्तर से ही की जाती थी. कहा जा रहा है कि इस बार इस संवर्ग के स्थानांतरण को लेकर पहले से ही माननीय की नजर थी. लिहाजा वजीर की मर्जी से कुछ लोग ट्रांसफऱ की दुकान खोल कर बैठ गए थे. बड़ी बोली लगाने वालों को वजीर के ‘मालिक’ से मिलवाया जा रहा था और महचाही पोस्टिंग की बात पक्की की जा रही थी. कहा जाता है कि अच्छी जगह लेने में कई सफळ हो गए। आउट वालों का जबरदस्त तरीके से इंट्री हुई। इसके बदले में मोटा चढ़ावा लेने की बात सामने आ रही है. इस काम में निरीक्षकीय स्तर के सरकारी सेवकों के नियोक्ता को पूरी तरह से अलग रखा गया . यह भी चर्चा है कि नियोक्ता को अलग करने का फायदा थैली वाले कुछ सेवकों को हुआ. मैनेज कर मनचाही पोस्टिंग ली गई.अपने-अपने हिसाब से जगह तय किया गया और वहां पर पदस्थापन करवाया . थैली वाले सरकारी सेवक जिनके नियोक्ता वो आईएएस अफसर हैं, वे इस पूरे खेल को समझ गए हैं. वे भी प्रतीक्षा में हैं. संभव है कि उल्टी गंगा बहवाकर उसमें हाथ धोने वाले लोग जो मनचाही पोस्टिंग लिए हैं उन पर कार्रवाई करें. बता दें, जिस विभाग की बात कर रहे हैं वो कमाई वाला डिपार्टमेंट है. सरकार के साथ-साथ अंदर के लोगों की भी जमकर कमाई होती है. वैसे बदनामी के मामले में भी अव्वल है. लोगों के दैनिक जीवन व ढोने वाला काम है.