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नेपाल में हिन्दी के पुरोधा स्व. राजेश्वर नेपाली की श्रद्धांजलि सभा मनायी गयी

-नेपाल में हिन्दी केपुरोधा स्व. राजेश्वर नेपाली की श्रद्धांजलि सभा मनायी गयी।

जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर।

गुरूवार को नेपाल भारत पुस्तकालय की सभाकक्ष में भारतीय राजदूतावास , हिंदी मासिक पत्रिका हिमालिनी तथा संवाद फाउंडेशन द्वारा संयुक्त रूप से स्व.राजेश्वर नेपाली की श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गयी इस श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि राजेश्वर नेपाली छात्रजीवन से ही प्रजातंत्र स्थापना के लिए लड़ते रहे।वे पढ़ाई के साथ-साथ नेपाल के प्रजातंत्र स्थापना मेंसक्रिय भूमिका निभाने वाले वी.पी.कोईराला, गिरिजा प्रसाद कोइराला,गणेशमान सिंह, भद्रकाली मिश्र, महेन्द्र नारायण निधि, रामनारायण मिश्र जैसे नेताओं के मार्गदर्शन का अनुशरण करते थे। आठवीं कक्षा में वेही क्रांतिकारी कविता लिखना शुरू किए थे। वे अपनी कलम से राजतंत्र के समाप्ति के लिए पत्रकारिता से लेख लिखना शुरू किए थे। राजतंत्र के विरोध में अखबार में लेख छपने के कारण वे कई वार जेल गये ।वे हिंदी कोनेपाल में मान्यता दिलाने के लिए मरते दम तक लड़ते रहे।वे लोकमत हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र के संपादक तथा प्रकाशक भी थे।

वे हिंदी, नेपाली , मैथिली के लव्ध प्रतिष्ठित साहित्यकार थे।उनके द्वारा लिखी दर्जनों पुस्तक प्रकाशित हो चुकी है। नेपाल भारत के सौ से अधिक संस्थाओं उन्हें सम्मानित कर चुका है। कार्यक्रम में बरिष्ठ साहित्यकार डा.राम दयाल राकेश,डा.गंगा प्रसाद अकेला, परमेश्वर कापड़ि, हिमालिनीके प्रबंध निदेशक ई.सच्चिदानंद मिश्र, हिमालिनी के संपादक तथा त्रिभुवन विश्वविद्यालय हिन्दी विभाग के प्राध्यापिका डा.श्वेता दीप्ति, पत्रकार युगनाथ पौडेल, संतोष साह सहित कई लोगों ने स्व.राजेश्वर नेपाली के व्यक्तित्व तथा कृतित्व पर प्रकाश डालें। भारतीय दूतावास के सत्येन्द्र दहिया ने राजेश्वर नेपाली के जीवनी पर प्रकाश डालें।