-काठमांडू में डॉ राणा रचित दिल का दीया का लोकार्पण
जनकपुरधाम/मिश्रीलाल मधुकर।
शनिवार को एक भव्य आयोजन में नेपाल के सुप्रसिद्ध साहित्यकार डॉ कृष्ण जंग राणा की बारहवीं कृति दिल का दीया का लोकार्पण किया गया।
‘दिल का दीया’ का प्रकाशन डॉ कृष्णचंद्र मिश्र पब्लिकेशन काठमांडू ने किया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नेपाल के उद्योगपति एवं साहित्य के क्षेत्र में चिर परिचित नाम श्री बसंत चौधरी थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिमालिनी के प्रबंध निदेशक श्री सच्चिदानंद मिश्र ने किया।
पुस्तक लोकार्पण के बाद डॉ राणा ने अपनी कुछ रचनाओं का वाचन किया और अपनी मधुर आवाज में चंद शेर को गुनगुना कर प्रस्तुत किया।
दिल का दीया पुस्तक की समीक्षा भारतीय दूतावास के सूचना एवं संस्कृति विभाग के श्री सत्येंद्र दहिया ने की, आपने कहा कि दिल का दीया हिमालय से निकली हुई नेपाल की गंगा है जिसमें जिंदगी के हर रंग शामिल हैं।
डॉ राणा को हिंदी केंद्रीय विभाग की अध्यक्ष डॉ संजीता वर्मा ने नेपाल में हिंदी साहित्य को समृद्ध करने के लिए विभाग द्वारा सम्मानित करते हुए कहा कि हिंदी साहित्य के क्षेत्र में डॉ राणा का अमूल्य योगदान है। आज हिंदी विभाग उन्हें सम्मानित करते हुए गौरवांवित है।
हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका ने डॉ राणा को साहित्य, समाज और संस्कृति के क्षेत्र में उन के अमूल्य योगदान के लिए डॉ कृष्णचंद्र मिश्र हिंदी सम्मान से सम्मानित किया।
उर्दू अकादमी के अध्यक्ष श्री इम्तियाज वफा ने अपने शुभकामना मंतव्य में कहा कि डॉ राणा का संपूर्ण जीवन प्रेरणादायक है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि श्री बसंत चौधरी ने अपने मंतव्य में डॉ राणा की अद्भुत ऊर्जा की सराहना की और कहा कि साहित्य के क्षेत्र में डॉ राणा की सक्रियता निस्संदेह अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि आज का यह दिन सचमुच अविस्मरणीय है। उन्होंने राणा जी को उनकी नवीनतम कृति दिल का दीया के लिए आत्मिक बधाई देते हुए कृष्णचंद्र मिश्र पब्लिकेशन को भी एक अच्छी कृति प्रकाशित करने के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा से भरपूर डॉ राणा की जिंदगी हम सब के लिए प्रेरणा है। जिंदगी का कोई भी दौर हो बस हौसला बनाए रखें यह सीख आपसे मिलती है। डॉ राणा की पंक्तियां उद्धृत करते हुए
प्यार के गीत ग़ज़ल गाएं तो अच्छा होगा
दिल से नफरत को मिटा पाएं तो अच्छा होगा
इससे पहले कि रहें या न रहें दुनिया में
चार दिन सुख से गुजर जाएं तो अच्छा होगा ।
उन्होंने अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की।
अतिथियों का स्वागत हिमालिनी की सम्पादक डॉ श्वेता दीप्ति ने किया ।कार्यक्रम का सफ़ल संचालन श्री सनत वस्ती जी और श्वेता दीप्ति ने किया।
कार्यक्रम का समापन अध्यक्षीय भाषण के साथ हुआ। अध्यक्ष सच्चिदानंद मिश्र ने सभी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह क्षण अद्भुत रहा। डॉ राणा की सु स्वास्थ्य की कामना के साथ आयोजन की समाप्ति हुई।















