-जिले के बॉर्डर क्षेत्रों में बढ़ा ठंड जनित बीमारियों का प्रकोप,बच्चे-बूढ़े पर अटैक
-सर्दी-खांसी-बुखार से पीड़ित हो रहे लोग
-पीड़ितों में बच्चों के साथ उम्रदराज महिला-पुरूष भी
मुुुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।
जिले एवं प्रखंड के पूर्वी-दक्षिणी क्षेत्र एवं पड़ोसी समस्तीपुर एवं दरभंगा जिला के सीमाई इलाकों के बच्चे-बूढ़े ठंड जनित बीमारियों के चपेट में हैं। प्रखंड के हत्था हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में औसतन 80 प्रतिशत से ज्यादा मरीज सर्दी-खांसी-बुखार से पीड़ित आ रहे हैं। इन पीड़ितों में बच्चे-बूढ़ों की संख्या ज्यादा रहती है।यहां की सीएचओ ममता कुमारी ने बताया कि रोजाना 50 से 60 मरीज आते हैं।जिसमें सर्दी-खांसी-बुखार से पीड़ित बच्चे-बूढ़े ज्यादा होते हैं।कई दिन तो ज्यादा संख्या भी रहती है। जिन्हें स्वास्थ्य जांच के बाद उचित सलाह के साथ ही आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं।

ऐसा है हाल:
ठंड शरीर को सता रही है।जनजीवन को प्रभावित की हुई है। एक तो रात बड़ी और दिन छोटा हो ही रहा है, उसमें भी सुबह-शाम की ठिठुरन और कुहासा से लोगों का दिन और भी सिमट गया है। कोहरा भले ही कम हो पर रात और सुबह में बह रही पछुआ हवा(पश्चिमी हवा) हाड़ कंपा रही है।
पूसा मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार न्यूनतम तापमान करीब 9से 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। मौसम के बदले इस मिजाज में बच्चों-बूढ़ों की तो जैसे शामत के दिन ही आ गए हैं।

क्या कहते हैं बुजुर्ग:
ग्रामीण चिकित्सक कृष्ण कुमार तिवारी ने कहा कि ये ठंड का मौसम बूढ़ों के लिए नहीं है। ठंड में बूढ़ों की धमनियों में एक तो रक्त प्रवाह की गति वैसे ही कम हो जाती है, हल्का-फुल्का टहलना भी बंद हो गया है।
केवट्सा में ओमप्रकाश ने बताया कि साल 2023 की विदाई के 10 दिन ही शेष रह गए हैं। अगहन का महीना भी विदाई की दहलीज पर खड़ा है। इसी समय में ठंड का दौर चरम पर रहता है, लेकिन अभी कड़ाके की ठंड पड़ते नहीं दिख रही है। यह और बात है कि वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से पछुआ हवा से शाम के बाद से ठंड बढ़ी हुई है।बाहर निकलने से पहले गर्म कपड़े पहनना जरूरी है।
चिकित्सकों ने दी सलाह:
ठंड को लेकर चिकित्सकों ने भी सचेत रहने की सलाह दी है।
प्रखण्ड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. नौशाद अहमद ने मौजूदा मौसम में बच्चे व बूढ़ों का विशेष रूप से ख्याल रखने की जरूरत पर बल दिया है।यदि बच्चों में ठंड और कंपकंपी के साथ उल्टी और बुखार की शिकायत है तो तुरंत चिकित्सक से मिलें।इस मौसम में भूख न लगने की शिकायत पर बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें।बच्चों को हमेशा गर्म कपड़े पहनाएं, टोपी और मोजे पहनाकर रखें।गर्म पौष्टिक आहार और मौसमी फलों का सेवन करें।
वहीं एपीएचसी सकरी मन के चिकित्सक डॉ. दीपक सिद्धार्थ ने बताया कि यहां शुगर और बीपी के मरीज ज्यादा ज्यादा सावधानी बरतें।घर के लोग बुजुर्गों का ज्यादा ख्याल रखें।घर के बुजुर्गों के अलावा भी प्रयास हो कि सभी गुनगुने पानी का ही सेवन करें।बच्चों को बिना गर्म कपड़ों के हरगिज न छोड़ें।
















