-किनकी पैंट होगी गिली ? शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर के पीत पत्र में ‘पेंट गिली होने’ से लेकर ‘शौचालय’ साफ कराने तक की चर्चा
संवाददाता।पटना।
बिहार के शिक्षा मंत्री का विवादों से गहरा नाता है. इस बार शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर ने विभाग के अपर मुख्य सचिव को पीत पत्र लिखा है. बच्चों का भविष्य संवारने वाले विभाग के मंत्री पीत पत्र में पैंट गिली करने की चर्चा कर रहे. प्रो. चंद्रशेखर ने अपने पीएस के माध्यम से शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक को जो पीत पत्र भेजा है वह वायरल हो गया है. वायरल पीत पत्र में पेंट गिली करने से लेकर नट-बोल्ट टाइट करने,सीधा करने,शौचालय साफ कराने तक की चर्चा है. आखिर शिक्षा मंत्री ने इन बातों का जिक्र क्यों किया…
शिक्षा मंत्री के सरकारी आप्त सचिव कृष्णा नंद यादव ने 4 जुलाई को मंत्री के निदेश पर पीत पत्र लिखा है. जिसमें कड़क, सीधा करने, नट बोल्ट टाईट करने, शौचालय सफाई, झारू मारने, ड्रेस पहनने, फोड़ने, डराने, पेंट गिली करने, नकेल कसने वेतन काटने, निलम्बित करने, उखाड़ देने, फाड़ देने जैसे शब्दों की चर्चा की गई है. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव के.के. पाठक को बेजे गए पीत पत्र में शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर के हवाले से लिखा गया है कि पिछले कई दिनों से यह महसूस किया जा रहा है कि विभाग मीडिया में नकारात्मक खबरों से अधिक चर्चा में रहा है। विभाग से संबंधित कोई भी पत्र / संकल्प आदि विभागीय पदाधिकारियों / मंत्री कोषांग में पहुंचने से पूर्व ही सोशल मीडिया / युट्यूब चैनलों तथा विभिन्न वॉट्सऐप ग्रुप में पारेषित होने लगते है। शिक्षा विभाग में ज्ञान से अधिक चर्चा कड़क, सीधा करने, नट बोल्ट टाईट करने, शौचालय सफाई, झारू मारने, ड्रेस पहनने, फोड़ने, डराने, पेंट गिली करने, नकेल कसने वेतन काटने, निलम्बित करने, उखाड़ देने, फाड़ देने जैसे शब्दों की हो रही है।

दरअसल, के. के. पाठक ने जब से शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव का पद भार ग्रहण किया है तब से लगातार व्यवस्था में सुधार की कोशिश कर रहे. एसीएस के कई आदेश से विभाग के अंदर हड़कंप है. सचिवालय से लेकर जिला स्तर तक के अधिकारियों को समय से दफ्तर आने का सख्त आदेश जारी किया गया है. स्कूलों में निरीक्षण को लेकर बड़ी फौज उतारी गई है. मद्याहन भोजन से लेकर अन्य स्कूली व्यवस्था को लेकर विभाग के एसीएस के.के. पाठक ने कई आदेश जारी किये हैं. इससे ये लगातार चर्चा में हैं. यही वजह है कि शिक्षा मंत्री ने अपरोक्ष तौर पर के. के पाठक पर पीत पत्र लिखकर निशाना साधा है।
शिक्षा मंत्री आगे लिखते हैं,” हद तो तब हो गई जब कार्यालय अवधि समाप्ति के पश्चात् कार्य कर रहे एक निदेशक के कक्ष से टी०वी० चैनल वाले लाइव टेलीकास्ट करते देखे गए। टी०वी० रिर्पोटर उनसे पूछताछ भी कर रहे थे और वे विश्रान्ति से जबाब दे रहे थे। यह भी संज्ञान में आया है कि कई रिर्पोटर/यू ट्यूबर को किसी अदृश्य व्यक्ति द्वारा विभागीय अधिकारी के दौरे/निरीक्षण की जानकारी पहले से ही प्राप्त हो जाती है तथा निरीक्षत स्थलों पर वे पहले से मौजूद रहते है। अवलोकित है कि वरीय अधिकारी द्वारा बंद कमरे में ली जा रही मीटिंग आदि से संबंधित खबर भी मीडिया में द्रुत गति से संचारित हो जाते है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि किसी खास व्यक्ति द्वारा निहित स्वार्थो की पूर्त्ति अथवा सरकार की छवि कुप्रभावित करने के उद्देश्य से विभागीय आन्तरिक खबरों को मीडिया में प्लांट किया जा रहा है। विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण व जनमानस से सरोकार रखने वाले खबरों को राज्य सरकार की घोषित नीति के अनुरूप प्रसारित करने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन नकारात्मक खबरों से विभाग व सरकार की छवि धूमिल हो रही है। विभागीय अधिकारियों का उपरोक्त कृत्य बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के विभिन्न प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही बिहार सरकार की सामाचार माध्यमों को खबर देने की सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के विपरीत है। शिक्षा मंत्री ने इस पर काफी अप्रसन्नता व्यक्त किया।












