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कांटी में राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई

-कांटी में राष्ट्रकवि दिनकर की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई

मुजफ्फरपुर। कांटी नगर परिषद स्थित साहित्य भवन में नूतन साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की जयंती समारोहपूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर क्षेत्र के साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्यप्रेमियों ने दिनकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। साथ ही उनके विराट साहित्यिक योगदान और व्यक्तित्व पर विचार-विमर्श किया गया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष चंद्रभूषण सिंह ‘चंद्र’ ने की। उन्होंने कहा कि रामधारी सिंह दिनकर मूलतः आग और राग के कवि थे। अपनी ओजस्वी लेखनी के माध्यम से उन्होंने हिंदी साहित्य को नई चेतना और दिशा प्रदान की। उनकी ‘उर्वशी’, ‘रश्मिरथी’, ‘हुंकार’ और ‘कुरुक्षेत्र’ जैसी कालजयी रचनाओं में मानवीय संवेदना, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है।

वक्ताओं ने कहा कि दिनकर के साहित्य में शौर्य का अर्थ केवल युद्ध और विजय नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय के खिलाफ मजबूती से खड़े होने का साहस भी है। उनकी रचनाएं नागरिकों में आत्मसम्मान और सामाजिक एकजुटता की भावना को मजबूत करती हैं।

परशुराम सिंह ने कहा कि दिनकर का साहित्य भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और जनभावनाओं से गहराई से जुड़ा है। स्वराजलाल ठाकुर ने कहा कि उनकी रचनाएं नई पीढ़ी को साहित्य सृजन के साथ राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराती हैं।

मौके पर चन्द्रकिशोर चौबे, सूबेदार नंदकिशोर ठाकुर, रामेश्वर सिंह, महेश कुमार, राकेश कुमार राय सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।