-कांटी में महाकवि निराला की पुण्यतिथि मनाई गई
-साहित्यकारों ने व्यक्तित्व और कृतित्व को किया याद
मुजफ्फरपुर। कांटी नगर परिषद स्थित साहित्य भवन में गुरुवार को नूतन साहित्यकार परिषद के तत्वावधान में हिंदी साहित्य के युगप्रवर्तक महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ की पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित साहित्यकारों, बुद्धिजीवियों और साहित्यप्रेमियों ने निराला के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया। वक्ताओं ने हिंदी साहित्य में उनके अतुलनीय योगदान की चर्चा करते हुए उनके विचारों और साहित्यिक आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए चंद्रभूषण सिंह ‘चंद्र’ ने कहा कि निराला हिंदी साहित्य के ऐसे अद्वितीय रचनाकार थे, जिन्होंने अपनी ओजस्वी लेखनी से सामाजिक रूढ़ियों, कुरीतियों और पाखंड का विरोध किया। उनकी रचनाओं में समाज के अंतिम व्यक्ति का संघर्ष, पीड़ा और मानवीय संवेदनाएं प्रभावशाली ढंग से अभिव्यक्त हुई हैं। उन्होंने हिंदी कविता को नई भाषा शैली, नवीन काव्य प्रयोगों और प्रगतिशील विचारधारा से समृद्ध किया। निराला की रचनाएं आज भी पाठकों को सामाजिक बदलाव के लिए प्रेरित करती हैं।

सेवानिवृत्त डीडीओ परशुराम सिंह ने कहा कि निराला का साहित्य केवल कल्पना की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि शोषण, असमानता और अन्याय के विरुद्ध एक सशक्त वैचारिक आंदोलन है। उनकी लेखनी ने समाज में व्याप्त विसंगतियों को उजागर करते हुए मानवीय मूल्यों की स्थापना का संदेश दिया।
सेवानिवृत्त शिक्षक स्वराज लाल ठाकुर ने कहा कि निराला ने हिंदी कविता को नई पहचान और व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया। उनकी रचनाएं स्वतंत्र चिंतन, सामाजिक दायित्व और मानवीय संवेदनाओं के प्रति जागरूक करती हैं। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में भी निराला का साहित्य सामाजिक सौहार्द, समानता और मानवीय मूल्यों को बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में चंद्रकिशोर चौबे, रामेश्वर महतो, सूबेदार नंदकिशोर ठाकुर, महेश कुमार, रजनीश कुमार सहित कई साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। सभी ने महाकवि निराला के साहित्यिक योगदान को याद करते हुए उनके विचारों को समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया।












