Advertisement

कलियुग में शारदीय नवरात्र का है विशेष महत्व : सुशील पांडेय

-कलियुग में शारदीय नवरात्र का है विशेष महत्व : सुशील पांडेय

मोतिहारी, राजन द्विवेदी।
धर्मार्थकाममोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थ को प्रदान करने वाली अखिल ब्रह्माण्ड नायिका आद्यशक्ति भगवती दुर्गा की आराधना के लिए शारदीय (आश्विन) नवरात्र का प्रारंभ आश्विन शुक्लपक्ष प्रतिपदा तदनुसार आज सोमवार से हो रहा है। इस दिन प्रतिपदा तिथि का मान रात्रि 01:19 बजे तक है,अतः कलश स्थापन के लिए शुभ मुहूर्त्त प्रातःकाल सूर्योदय से सायंकाल पर्यन्त प्रशस्त है। इस वर्ष चतुर्थी तिथि की वृद्धि होने के कारण दस दिनों का नवरात्र होगा। नवरात्र में तिथि की वृद्धि शुभफल कारक होती है। आश्विन मास के शुक्लपक्ष में आदि महाशक्ति भगवती दुर्गा के नव रूपों का क्रमशः महोत्सव के साथ पूजन-अर्चन करने के लिए इसे हम शारदीय नवरात्र के रूप में मनाते हुए प्रतिपदा (एकम) को घर-घर में कलश स्थापित कर अथवा अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार अनुष्ठान,पूजन व दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं। आज नवरात्र पूजन के प्रथम दिन कलश स्थापन के साथ भगवती दुर्गा की आराधना व दुर्गा सप्तशती का पाठ प्रारंभ हो जाएगा। माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूप में शैलपुत्री के नाम से जानी जाती है। नवरात्र पूजन के प्रथम दिन देवी को गाय का घी भोग लगाना चाहिए। आश्विन मास के शुक्लपक्ष में आदि महाशक्ति भगवती दुर्गा के नव रूपों का क्रमशः महोत्सव के साथ पूजन-अर्चन करने के लिए इसे हम शारदीय नवरात्र के रूप में मनाते हुए प्रतिपदा को घर-घर में कलश स्थापित कर अथवा अपनी शक्ति-सामर्थ्य के अनुसार अनुष्ठान,पूजन व दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं।
उक्त जानकारी महर्षिनगर स्थित आर्षविद्या शिक्षण प्रशिक्षण सेवा संस्थान-वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पाण्डेय ने दी।


उन्होंने बताया कि शास्त्रीय मान्यता के अनुसार सत्ययुग में चैत्र नवरात्र,त्रेतायुग में आषाढ़ नवरात्र,द्वापरयुग में माघ नवरात्र एवं कलियुग में आश्विन (शारदीय) नवरात्र का विशेष महत्व है। मातेश्वरी दुर्गा धर्मार्थकाममोक्ष चतुर्विध पुरुषार्थ को प्रदान करने वाली हैं। अखिल ब्रह्माण्ड नायिका माता दुर्गा परमेश्वर की उन प्रधान शक्तियों में से एक हैं जिनको यथा समय आवश्यकतानुसार प्रकटित कर परब्रह्म परमात्मा ने विश्व का कल्याण किया है। इनकी आराधना मनुष्य श्रद्धा एवं भक्ति पूर्वक “यं यं चिन्तयते कामं तं तं प्राप्नोति निश्चितम्ʼʼ के अनुसार जिस कामना से करता है,थोड़ा प्रयास से ही उसकी सिद्धि होती है। उसी परमात्मा की आद्या शक्ति दुर्गा की उत्पत्ति एवं महात्म्य का वर्णन महर्षि वेदव्यास रचित मार्कण्डेय पुराण के सावर्णिक मन्वंतर कथा के अन्तर्गत देवी महात्म्य में किया गया है। वही अंश जगत्प्रसिद्ध दुर्गा सप्तशती के नाम से प्रत्येक आस्तिक जन के मानस पटल में कल्पवृक्ष के समान व्याप्त है।
देवी भागवत के अनुसार माता दुर्गा का वाहन शेर है,लेकिन हर वर्ष नवरात्र में भगवती अलग-अलग वाहनों पर सवार होकर पृथ्वी पर आतीं हैं। इस वर्ष नवरात्र प्रारंभ का दिन सोमवार होने से भगवती का आगमन `शशिसूर्ये गजारूढाʼ के अनुसार गज अर्थात् हाथी पर हो रहा है जिसका फल `गजे च जलदा देवीʼ के अनुसार अच्छी वर्षा का योग है। वही गुरुवार को विजयादशमी पड़ने के कारण `सुरराजगुरौ यदि सा विजया नरवाहनगा शुभसौख्य कराʼ के अनुसार भगवती का प्रस्थान डोली पर होगा जिसका फल शुभ-सौख्य प्रदान करने वाला है।