-हरियाली तीज आज: शिव-पार्वती की पूजा कर सुहागिनें रखेंगी व्रत, मिथिला में मधुश्रावणी का होगा समापन
मुजफ्फरपुर/बिहार। सावन शुक्ल तृतीया के पावन अवसर पर शनिवार को हरियाली तीज का पर्व श्रद्धा, आस्था और उमंग के साथ मनाया जाएगा। सनातन परंपरा में यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन का प्रतीक माना जाता है। सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करेंगी।
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार सावन शुक्ल तृतीया पर सुबह 6:30 बजे तक पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र रहेगा, इसके बाद पूरे दिन उत्तर फाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव रहेगा। इस दौरान शिव योग, सिद्ध योग, रवियोग और जयद् योग का शुभ संयोग बनने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यताओं में इन योगों को मंगलकारी माना जाता है। ऐसे में मंदिरों और घरों में हरियाली तीज की पूजा को लेकर विशेष तैयारियां की गई हैं।
हरियाली तीज महिलाओं के लिए केवल व्रत और पूजा का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, स्नेह और दांपत्य जीवन की खुशहाली से जुड़ी पुरानी परंपरा भी है। महिलाएं सोलह श्रृंगार करती हैं, हाथों में मेहंदी रचाती हैं और झूला झूलकर पर्व की खुशियां मनाती हैं। कई स्थानों पर तीज के गीत और पारंपरिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।

पूजा के दौरान भगवान शिव का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक किया जाएगा। श्रद्धालु बेलपत्र अर्पित कर परिवार की सुख-समृद्धि और संतान की मंगलकामना करेंगे। दुर्गा के 108 नामों का पाठ और दुर्गा सप्तशती के 11वें अध्याय का पाठ भी शुभ माना गया है।
कुंवारी युवतियां भी मनचाहे जीवनसाथी की कामना से हरियाली तीज का व्रत रखकर उमा-महेश्वर की पूजा करेंगी। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसी मान्यता के कारण अविवाहित युवतियां अच्छे जीवनसाथी की कामना से यह व्रत करती हैं।
मिथिला समाज के लिए भी आज का दिन विशेष है। पिछले 13 दिनों से चल रहे मधुश्रावणी पर्व का समापन 15 अगस्त को होगा। समापन के अवसर पर नवविवाहिताओं से जुड़ी पारंपरिक धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। टेमी दागने की रस्म के साथ नवविवाहिताएं सुहागिन महिलाओं को सिंदूर का मंगल टीका लगाकर उनका आशीर्वाद लेंगी।
हरियाली तीज और मधुश्रावणी दोनों ही पर्व भारतीय संस्कृति में नारी आस्था, दांपत्य प्रेम और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से जुड़ी गहरी परंपराओं को दर्शाते हैं। सावन की हरियाली, शिव-पार्वती की आराधना, मेहंदी, झूले और मंगल गीतों के बीच बिहार में शनिवार को आस्था और उल्लास का रंग और गहरा नजर आएगा।












