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स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल, दलित बस्ती में आज भी चचरी के सहारे आवागमन

-स्मार्ट सिटी के दावों पर सवाल, दलित बस्ती में आज भी चचरी के सहारे आवागमन

-मुख्य सचिव के वार्ड की बदहाल तस्वीर!

मुजफ्फरपुर। स्मार्ट सिटी के दावों के बीच मुजफ्फरपुर नगर निगम के वार्ड संख्या-34 की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। यह वही वार्ड बताया जा रहा है, जहां बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत का आवासीय क्षेत्र आता है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की योजनाओं और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के बावजूद इलाके में मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।
स्थानीय नागरिकों के अनुसार वार्ड की दलित बस्ती में आज भी लोग चचरी (बांस के अस्थायी पुल) के सहारे आने-जाने को मजबूर हैं। कई स्थानों पर कूड़े का अंबार लगा हुआ है, जिससे गंदगी और संक्रमण का खतरा बना रहता है। लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।


आरोप है कि सफाई व्यवस्था के लिए निर्धारित 22 सफाई कर्मियों के मुकाबले प्रतिदिन केवल 12 से 16 कर्मी ही ड्यूटी पर पहुंचते हैं। वहीं, सुपर सकर मशीन भी पूरे वर्ष में गिने-चुने दिनों तक ही संचालित होती है। स्थानीय लोगों का दावा है कि यदि नगर निगम का रिकॉर्ड खंगाला जाए तो मशीन आठ-दस दिन से अधिक नहीं चली होगी।
वार्डवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि आमगोला पुल से लेकर नीम चौक और सदपुरा गुमटी तक नालियां पानी और गाद से भरी हुई हैं, जिससे जलनिकासी प्रभावित हो रही है और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का उद्घाटन किए जाने के बावजूद वार्ड संख्या-34 की जमीनी स्थिति विकास के दावों से मेल नहीं खाती। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से सफाई व्यवस्था में सुधार, नालों की नियमित सफाई और दलित बस्ती में आवागमन की स्थायी व्यवस्था कराने की मांग की है।
वार्ड पार्षद चंदा कुमारी के वार्ड में व्याप्त इन समस्याओं को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। अब देखना होगा कि नगर निगम प्रशासन और संबंधित अधिकारी इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करते हैं।