-जान हथेली पर रखकर पार करते हैं नदी, एक पुल के लिए तरसे लोग; हादसों से भी नहीं लिया सबक
सम्वाददाता। मुजफ्फरपुर।
मुजफ्फरपुर जिले के बेनीबाद ओपी क्षेत्र के मधुरपट्टी गांव की करीब एक हजार आबादी के लिए नाव ही सहारा है। शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर हर जरूरत के लिए बागमती जैसी नदी पार करना मजबूरी है। गांव में प्राथमिक स्कूल से अधिक की पढ़ाई नहीं होती। जन वितरण प्रणाली की दुकान भी इस गांव में नहीं है।
सभी काम में होने वाली परेशानी को देखते हूुए मधुरपट्टी के ग्रामीणों ने कई बार यहां घाट पर पुल निर्माण की मांग उठाई, मगर जनप्रतिनिधियों ने अब तक इस पर ध्यान नहीं दिया है।
पूर्व में भी वर्ष 2002 में भटगामा गांव के जगदीश साह के परिवार के पांच लोगों की मौत नाव हादसे में हो चुकी है। बता दें कि प्रतिदिन सुबह से शाम तक चार से पांच सौ लोग नाव से आवामन करते हैं। इसके बावजूद गांव में न मध्य विद्यालय हो सका और न ही जन वितरण प्रणाली की दुकान।

हादसे में बचाए गए लोगों का गायघाट CHC में इलाज
मधुरपट्टी घाट पर नाव पलटने के हादसे में बचाए गए सात लोगों का गायघाट समुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में इलाज किया गया। इनमें मधुरपट्टी के मो. मोथीब की पत्नी बिपत खातून व पुत्री नसीमा, सुबोध चौपाल की पत्नी रेखा देवी, बिनोद चौपाल की पत्नी रेखा देवी, मो. नसीद की पुत्री निरखत परवीन, मो. अबादुल की पत्नी शाहजहां, मो. अजीबुल की पत्नी निखत शामिल हैं।
सभी को इलाज के बाद खतरे से बाहर बताया गया है। बता दें कि हादसे में एक महिला शिक्षका समेत अन्य सात लोग भी सकुशल बच गए। इधर, गुरुवार को घटनास्थल पर जनप्रतिनिधियों का तांता लगा रहा।
हादसे के बाद मौके पर सांसद अजय निषाद, विधायक निरंजन राय, प्रमुख श्रवण कुमार सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष रंजन सिंह, अशोक सिंह, लोजपा नेत्री कोमल सिंह, जदयू नेता प्रभात किरण, मुखिया प्रतिनिधि देवेंद्र यादव, पूर्व मुखिया प्रतिनिधि प्रमोद यादव, बिकाउ यादव आदि पहुंचे थे।












