-मृत्यु निश्चित है, पर भगवान का स्मरण उसे मंगलमय बना सकता है : छोटे बापू
वैशाली/मोहन कुमार सुधांशु।
गोरौल के चैनपुर गांव स्थित सर्व मनोकामना सिद्ध संकट मोचन हनुमान मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दौरान भागवत मर्मज्ञ छोटे बापू जी महाराज ने श्रोताओं को जीवन और मृत्यु के गूढ़ रहस्यों से अवगत कराया।
उन्होंने श्री सुखदेव और राजा परीक्षित के संवाद का उल्लेख करते हुए कहा, “राजा परीक्षित को ज्ञात था कि उनकी मृत्यु सातवें दिन होगी, तब उन्होंने सुखदेव जी से प्रश्न किया कि मृत्यु का सामना करने वाले को क्या करना चाहिए। सुखदेव जी ने उत्तर दिया कि मृत्यु अवश्यंभावी है, और ऐसे समय में भगवान की कथा, नाम और स्मरण ही मृत्यु को मंगलमय बना सकता है।”

छोटे बापू जी महाराज ने श्रोताओं को कर्म की श्रेष्ठता का बोध कराते हुए कहा कि जीवन चाहे छोटा हो या बड़ा, वह कल्याणकारी और धर्ममय होना चाहिए। उन्होंने भगवान शंकराचार्य और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों के जीवन से प्रेरणा लेने की बात कही, जिन्होंने कम आयु में ही जगत को जीवन का वास्तविक अर्थ बताया।
उन्होंने भगवान के 24 अवतारों की चर्चा करते हुए श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतारों का उद्देश्य बताया—श्रीराम ने मर्यादा और श्रीकृष्ण ने प्रेम व भक्ति का संदेश दिया। दोनों ने अधर्म और दुष्टों का नाश कर धर्म की पुनर्स्थापना की।
कथा के दौरान भव्य रूप से श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। जब व्यास सियाराम दास जी महाराज ने भजन “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” गाया, तो श्रद्धालु भक्ति भाव में झूमने को विवश हो गए।











