-बिहार में 16 से 20 सितंबर तक हल्की से मध्यम बारिश के आसार
-किसानों के लिए कृषि मौसम सेवा ने जारी की सलाह
-अरहर की बुआई पूरी करने का प्रयास करें, धान में खैरा रोग और गंधी बग की नियमित निगरानी की सलाह
समस्तीपुर/पूसा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं भारत मौसम विज्ञान विभाग के सहयोग से 16 से 20 सितंबर 2026 तक का मध्यावधि मौसम पूर्वानुमान जारी किया गया है। पूर्वानुमान के अनुसार इस अवधि में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रह सकते हैं और अधिकांश स्थानों पर छिटपुट बारिश होने की संभावना है।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार 16 से 18 सितंबर के आसपास कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। बेगूसराय और पश्चिमी चंपारण जिलों में गरज-चमक के साथ अच्छी बारिश होने का भी अनुमान है। इस दौरान अधिकतम तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 23 से 27 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। हालांकि गोपालगंज में न्यूनतम तापमान अपेक्षाकृत अधिक, करीब 29 से 30 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता 80 से 95 प्रतिशत और दोपहर में 55 से 65 प्रतिशत के आसपास रहने की संभावना है। इस दौरान हवा मुख्य रूप से पूर्वी या दक्षिण-पूर्वी दिशा से 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकती है।
पिछले तीन दिनों के मौसम के आकलन के अनुसार पूसा में औसत अधिकतम तापमान 33.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह सापेक्ष आर्द्रता 88 प्रतिशत और दोपहर में 77 प्रतिशत रही। हवा की औसत गति 7.1 किलोमीटर प्रति घंटा तथा दैनिक वाष्पन 4.7 मिलीमीटर दर्ज किया गया। इस अवधि में 3.0 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।

कृषि मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि अरहर की बुआई जल्द पूरी करने का प्रयास करें। शरद, पूसा-9 और राजेंद्र अरहर-1 जैसी किस्मों को उपयुक्त बताया गया है। अरहर की खेती ऊंचास जमीन में करने की सलाह दी गई है। प्रति हेक्टेयर 45 से 50 किलोग्राम बीज की दर से 30×10 से 15 सेंटीमीटर दूरी पर बुआई करने को कहा गया है।
गन्ने की फसल में निचली भूमि में जलजमाव की स्थिति बनने पर तत्काल जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी गई है, क्योंकि जलजमाव से कीट एवं रोग का प्रकोप बढ़ सकता है। फसल में लाल सड़न अथवा सूखा का शुरुआती प्रकोप दिखाई देने पर रोगग्रस्त पौधों को जड़ सहित निकालकर खेत से बाहर करने की सलाह दी गई है।
धान की फसल में खैरा रोग की नियमित निगरानी करने को कहा गया है। यह रोग सामान्यतः जिंक की कमी से संबंधित होता है। रोग के लक्षण दिखाई देने पर जिंक सल्फेट और चूने के घोल का पत्तियों पर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। वहीं, धान में दूधिया/दाना भरने की अवस्था के दौरान गंधी बग के प्रकोप की भी नियमित निगरानी करने को कहा गया है।
सब्जी उत्पादकों को फूलगोभी की मध्य अवधि वाली पूसा हिम ज्योति, डी-96 और पंत शुभ्रा जैसी किस्मों की रोपाई इस माह करने की सलाह दी गई है। पत्तागोभी की बुआई भी जारी रखने को कहा गया है। मूंग और उड़द में पीला शिरा मोजेक रोग की निगरानी करने तथा रोगग्रस्त पौधों को उखाड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
लौकी, तोरई, करेला, खीरा और नेनुआ जैसी फसलों में फल मक्खी के प्रकोप पर नजर रखने की सलाह दी गई है। संक्रमित फलों को एकत्र कर गड्ढे में दबाने तथा प्रति एकड़ 4 से 8 फल मक्खी ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है।
पशुपालकों को संक्रामक रोगों से बचाव के लिए पशु चिकित्सक की सलाह का पालन करने तथा मक्खी-मच्छर समेत अन्य कीटों के नियंत्रण के लिए पशुशाला के आसपास चूने के पानी का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।












