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बिहार की दो बड़ी परियोजनाओं का जलवा, विश्वकर्मा अवॉर्ड 2026 के लिए हुआ चयन

-बिहार की दो बड़ी परियोजनाओं का जलवा, विश्वकर्मा अवॉर्ड 2026 के लिए हुआ चयन

पटना, 31 मार्च 2026दीपक तिवारी:
बिहार के लिए गर्व की बात है कि बापू टावर, पटना और बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप, वैशाली को 17वीं CIDC विश्वकर्मा अवॉर्ड्स-2026 के लिए चयनित किया गया है। इन दोनों परियोजनाओं को Best Construction Projects श्रेणी में जगह मिली है, जो राज्य के उत्कृष्ट निर्माण कार्य और इंजीनियरिंग क्षमता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाली उपलब्धि है।
भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह विभाग के लिए अत्यंत गौरव का क्षण है। उन्होंने बताया कि यह सफलता इंजीनियरों, आर्किटेक्ट्स और निर्माण टीम की कड़ी मेहनत, तकनीकी उत्कृष्टता और समर्पण का परिणाम है।
उन्होंने यह भी कहा कि विभाग लगातार आधुनिक वास्तुकला और निर्माण शैली में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है, जिससे देश-दुनिया के सामने बिहार की नई पहचान बन रही है। इससे पहले सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र और अंजुमन इस्लामिया हॉल को भी विश्वकर्मा अवॉर्ड मिल चुका है।


मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच का जिक्र करते हुए कहा गया कि बिहार अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करते हुए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है। इन परियोजनाओं से राज्य के पर्यटन और सांस्कृतिक गौरव को नई ऊंचाई मिल रही है।
गर्दनीबाग स्थित बापू टावर में महात्मा गांधी के जीवन, विचारों और बिहार से उनके संबंध को आधुनिक ऑडियो-विजुअल तकनीकों के माध्यम से जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है, बल्कि छात्रों और युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक स्थल भी बन चुका है।
वहीं, वैशाली में 72 एकड़ क्षेत्र में निर्मित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप बौद्ध विरासत का भव्य प्रतीक बनकर उभरा है। भगवान बुद्ध के स्मृति अवशेषों को संरक्षित करने के साथ-साथ यह स्थल देश-विदेश के बौद्ध श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख तीर्थ बन गया है। राजस्थान के वंशी पहाड़पुर के बलुआ पत्थरों से निर्मित इस स्तूप को आधुनिक भूकंपरोधी तकनीकों से तैयार किया गया है, जिससे इसकी संरचना लंबे समय तक सुरक्षित रह सकेगी।
जुलाई 2025 में उद्घाटित यह परियोजना न केवल पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, बल्कि बिहार की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर मजबूत कर रही है।