-पुसा कृषि विश्वविद्यालय में तीन दिवसीय कृषि मेले का भव्य उद्घाटन
रामजी कुमार। समस्तीपुर/पूसा: डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पुसा के खेल मैदान में आयोजित तीन दिवसीय कृषि मेले का उद्घाटन शनिवार को बिहार सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुसा की मिट्टी अत्यधिक उपजाऊ है और यहां के वैज्ञानिक नई कृषि तकनीकों पर बेहतरीन कार्य कर रहे हैं।
मंत्री ने विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पीएस पांडेय से आग्रह किया कि स्थानीय लोगों को विवि में रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएं।
कृषि की आधुनिक तकनीकों पर जोर:
कुलपति डॉ. पांडेय ने किसानों को संबोधित करते हुए कहा कि खेती अब पारंपरिक नहीं रही, बल्कि आधुनिक तकनीकों पर आधारित हो गई है। उन्होंने “पांच म मंत्र”—मसाला, मछली, मखाना, मशरूम और मीडिया सेंटर—पर जोर देते हुए कहा कि विवि इन सभी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है।
मसाला उत्पादन: विशेष रूप से समस्तीपुर हल्दी उत्पादन के लिए उपयुक्त है।
मछली पालन: उत्तर बिहार के जल संसाधनों का उपयोग कर किसानों की आय बढ़ाने के लिए विवि काम कर रहा है।
मखाना उद्योग: बिहार में बने मखाना बोर्ड से किसानों को लाभ मिलेगा।
मशरूम उत्पादन: बिहार मशरूम उत्पादन में नंबर 1 बन चुका है, और अब मशरूम पनीर जैसी नई तकनीकों पर कार्य हो रहा है।
मीडिया सेंटर: विश्वविद्यालय ने रेडियो स्टेशन की शुरुआत की है, जो किसानों को मौसम, कृषि तकनीकों और फसल प्रबंधन से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां देगा।

विशेषज्ञों ने जलवायु परिवर्तन और जल संरक्षण पर दिए सुझाव:
बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के अध्यक्ष डॉ. गिरीश चौधरी ने कहा कि जलवायु परिवर्तन एक बड़ी चुनौती बन गया है और वृक्षारोपण के साथ-साथ पेड़ों को बचाने के लिए ठोस रणनीति बनानी होगी।
पटना विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजय कुमार सिंह ने जल संकट पर चिंता जताते हुए कहा कि पानी के दुरुपयोग को रोकना आवश्यक है, अन्यथा भविष्य में जल स्रोतों की गंभीर समस्या खड़ी हो सकती है।
किसानों के लिए प्रेरणादायक बातें:
पद्मश्री “किसान चाची” राजकुमारी देवी ने कहा कि संगठित होकर खेती करने से किसानों को अधिक लाभ मिल सकता है। उन्होंने बताया कि अचार बनाने के छोटे से काम ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
समस्तीपुर के डीडीसी शेखर सुमन प्रियदर्शी ने कहा कि जब किसान संपन्न होंगे, तभी देश संपन्न होगा। एक समय था जब भारत को खाद्यान्न आयात करना पड़ता था, लेकिन आज किसान इतनी पैदावार कर रहे हैं कि देश से अनाज का निर्यात हो रहा है।
नई पुस्तकों का विमोचन:
इस दौरान विवि द्वारा प्रकाशित “किसान मेला स्मारिका” और “आधुनिक किसान मेला पत्रिका” का विमोचन किया गया, जिसमें विवि के वैज्ञानिकों के शोध कार्यों को प्रकाशित किया गया है।
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