-बन्दरा के इस विद्यालय में भवन के अभाव में बरामदे एवं पेड़ के नीचे चलती हैं कक्षाएं
-कभी भी हो सकते हैं बड़े हादसे
-एक तरफ श्राद्ध-विवाह पूजन के लिए जुटते हैं लोग,दूसरी ओर पढ़ते रहते हैं स्कूल के बच्चे
-भवन के अभाव में परेशान हैं शिक्षक-छात्र

मुजफ्फरपुर/बन्दरा। दीपक कुमार तिवारी।
मीनापुर के प्राथमिक विद्यालय में स्कूली बच्चों के ऊपर पीपल के पेड़ गिरने की घटना से यदि सबक नहीं लिया गया तो बन्दरा प्रखंड क्षेत्र में भी इस तरह की घटना घट सकती है, क्योंकि यहां बन्दरा प्रखंड का एक ऐसा प्राथमिक विद्यालय है। जहां विद्यालय का भवन पूर्णतः जर्जर है। विद्यालय भवन के जमीन का फर्श टूट चुका है,छत से चट उखड़कर गिरते रहते हैं। लिहाजा बच्चों को बरामदे पर तथा इससे सटे एवं प्रांगण में स्थित पीपल(ब्रह्मस्थान)के पेड़ के नीचे बैठ कर बच्चों को पढ़ाई जाती है।यहीं प्रार्थना, पढ़ाई,खेल एवं मध्यान भोजन आदि गतिविधियां होती हैं। यह विद्यालय प्रखण्ड के करमैठा में स्थित प्राथमिक विद्यालय है। बताया जाता है यह व्यवस्था आज से नहीं, कई सालों से है। पहले स्कूली भवन काम चलाउ होने की वजह से बच्चे को कक्ष में बैठाकर पढ़ाया जाता था। अब कई सालों से बच्चों को अपना कक्ष नसीब नहीं है।लिहाजा बरामदे पर और पेड़ के नीचे पढाने की मजबूरी होती है। स्कूल के प्रभारी प्रधानाध्यापक मृत्युंजय कुमार ने बताया कि भवन निर्माण को लेकर कई बार विभाग को लिखा गया। यहां जांच के क्रम में आने वाले पदाधिकारी को भी इस हालत के बारे में बताया गया और भवन निर्माण की मांग की गई,लेकिन अब तक विद्यालय के भवन निर्माण का सपना पूरा नहीं हो सका है, लिहाजा बच्चों को बरामदे पर और बाहर पेड़ के नीचे बैठा कर पढाने की मजबूरी है। बच्चों को मध्यान्ह भोजन भी पेड़ के नीचे ही बैठाकर खिलानी पड़ती है। तेज धूप और बरसात के दिनों में ज्यादा परेशानी होती है। दूसरा कोई विकल्प उनके विद्यालय में उपलब्ध नहीं है।

शुक्रवार को विद्यालय में बच्चों को पढ़ रहे शिक्षिका रूबी कुमारी एवं अर्चना भारती ने बताया कि ठंड,बरसात एवं गर्मी में भी बच्चों को खुले आसमान के नीचे पढाने की मजबूरी होती है । जैसी व्यवस्था उपलब्ध है, उसी में उन लोगों को गुजारा करना पड़ता है। ज्यादा वर्षा होने की स्थिति में तो बच्चों को छुट्टी कर देना पड़ता है। कई बार पेड़ के टहनियों पर बैठे चिड़ियों का बिट भी नीचे बच्चों या उनके थाली( खानों)में गिरते रहता है।

वही विद्यालय परिसर में पीपल(ब्रह्म स्थान) होने की वजह से शादी विवाह के मौसम में लोग यहां पूजा पाठ के लिए भी गाजे-बाजे के साथ आते रहते हैं। इस दौरान भी कई तरह की परेशानी रहती है।श्राद्ध पूजन के लिए भी लोग यहीं आते हैं।इस दौरान भी परेशानी होती है।मसलन श्राद्ध-विवाह के मंत्रोच्चार एवं डीजे साउंड म्यूजिक के बीच कई बार यहां बच्चे कई घण्टे तक पढ़ते रहते हैं।इस दौरान मनाही पर भी लोग नहीं मानते। शुक्रवार को विद्यालय में बच्चे उपस्थित थे। बच्चे सहज एवं बेख़ौफ़ अंदाज में बैठे-पढ़ते दिखे।












