-साइकिल पर अचार बेचने वाली ‘किसान चाची’ ने 4000 महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
मुजफ्फरपुर। बिहार के मुजफ्फरपुर जिले की राजकुमारी देवी, जिन्हें पूरा देश आज ‘किसान चाची’ के नाम से जानता है, अपनी मेहनत, दूरदर्शिता और उद्यमिता के दम पर सफलता की ऐसी मिसाल बन चुकी हैं, जो लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। एक साधारण गृहिणी से देश के चौथे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री तक का उनका सफर इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों के सामने आर्थिक तंगी और सामाजिक चुनौतियां भी छोटी पड़ जाती हैं।
राजकुमारी देवी का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। शादी के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर थी और पति की बेरोजगारी के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया था। ऐसे समय में उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खेती के जरिए आत्मनिर्भर बनने का फैसला किया। वर्ष 1990 के आसपास, जब ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं का घर से बाहर निकलकर काम करना आसान नहीं माना जाता था, तब उन्होंने अपने घर की बाड़ी में फल और सब्जियों की खेती शुरू की।
खेती के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि केवल ताजी सब्जियां बेचने से अधिक लाभ नहीं मिल सकता, क्योंकि वे जल्दी खराब हो जाती हैं। इसी सोच ने उन्हें कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन (वैल्यू एडिशन) की ओर प्रेरित किया। उन्होंने बची हुई सब्जियों और फलों से अचार, मुरब्बा, जैम और जेली तैयार करना शुरू किया। यहीं से उनके सफल व्यवसाय की नींव पड़ी।

अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए उनके पास न कोई दुकान थी और न ही बड़ा निवेश। उन्होंने खुद ही साइकिल पर अचार के डिब्बे लादकर गांव-गांव और बाजारों में जाकर बिक्री शुरू की। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया, लेकिन उनके अचार के स्वाद और गुणवत्ता ने जल्द ही लोगों का भरोसा जीत लिया। धीरे-धीरे उनका उत्पाद स्थानीय बाजार में लोकप्रिय हो गया और ‘किसान चाची’ एक पहचान बन गई।
उन्होंने अपने उद्यम को ‘आनंदपुर कृषि फॉर्म’ का नाम दिया और बढ़ती मांग के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी अपने साथ जोड़ना शुरू किया। उन्होंने महिलाओं को अचार, मुरब्बा, जैम और जेली बनाने का प्रशिक्षण दिया। आज उनके इस मॉडल से 4,000 से अधिक महिलाएं जुड़कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
ग्रामीण उद्यमिता और महिला सशक्तिकरण में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने वर्ष 2019 में उन्हें पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी सम्मान मिल चुका है। आज वे देश के विभिन्न प्रबंधन संस्थानों और विश्वविद्यालयों में जाकर युवाओं को कृषि आधारित उद्यमिता, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का पाठ पढ़ाती हैं।
किसान चाची राजकुमारी देवी की सफलता की कहानी यह संदेश देती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद नई सोच, मेहनत और बाजार की समझ के बल पर न केवल खुद सफल हुआ जा सकता है, बल्कि हजारों लोगों के जीवन में भी सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उनकी उपलब्धियां आज बिहार ही नहीं, पूरे देश के लिए गर्व का विषय हैं।












