-15 जुलाई से शुरू होगी आषाढ़ गुप्त नवरात्रि
-जानिए घटस्थापना का शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व
मुजफ्फरपुर। सनातन धर्म में आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस वर्ष आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 15 जुलाई से होगा। हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष में चार बार नवरात्रि मनाई जाती है, जिनमें दो प्रत्यक्ष और दो गुप्त नवरात्रि होती हैं। आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि को विशेष रूप से साधना, तप और देवी उपासना के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
अखंड भारत पुरोहित महासभा के विद्वान पंडित हरिशंकर पाठक के अनुसार गुप्त नवरात्रि में आदि शक्ति मां दुर्गा की गुप्त रूप से आराधना करने से साधकों को दस महाविद्याओं की कृपा और आध्यात्मिक सिद्धि प्राप्त होती है। शास्त्रों में आषाढ़ गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना और विशेष उपासना के लिए अत्यंत शक्तिशाली और शुभ बताया गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। श्रद्धालु पूरे नौ दिनों तक व्रत रखकर मां भगवती की आराधना करते हैं। विशेष रूप से तंत्र साधना से जुड़े साधकों के लिए इस नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है।
पंडित हरिशंकर पाठक ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना (कलश स्थापना) का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष 15 जुलाई को सुबह 6:11 बजे से 11:26 बजे तक घटस्थापना का सर्वोत्तम शुभ मुहूर्त रहेगा। यदि किसी कारणवश श्रद्धालु इस समय में कलश स्थापना नहीं कर पाते हैं, तो वे दोपहर 1:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक के शुभ चौघड़िया मुहूर्त में भी विधि-विधान के साथ घटस्थापना कर सकते हैं।
धर्माचार्यों का मानना है कि श्रद्धा, संयम और नियमपूर्वक की गई मां दुर्गा की उपासना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान मंदिरों और पूजा स्थलों पर विशेष धार्मिक अनुष्ठान एवं देवी आराधना का आयोजन भी किया जाएगा।












