-सरस्वती विद्या मंदिर में दीपोत्सव और छठ की धूम: विद्यार्थियों ने बिखेरी भारतीय संस्कृति व लोक आस्था की अनुपम छटा
-पर्व हमारी सामाजिक समरसता और संस्कारों की पहचान’
-कृत्रिम घाट पर पारंपरिक रीति से दिया गया सूर्यदेव को अर्घ्य
जमालपुर (मुंगेर):
सरस्वती विद्या मंदिर, दौलतपुर जमालपुर में दीपावली एवं लोक आस्था के महापर्व छठ के पावन अवसर पर भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विद्यालय के भैया-बहनों ने आकर्षक नृत्य एवं भावपूर्ण नाटकीय मंचन के माध्यम से भारतीय संस्कृति, पारिवारिक संस्कार और लोक आस्था की अनुपम छटा बिखेरी।
कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ प्रधानाचार्य छठु साह, उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार तथा अन्य आचार्यों एवं अतिथियों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम के पहले चरण में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने दीपावली पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके बाद विभिन्न कक्षाओं के विद्यार्थियों ने दीपोत्सव के उल्लास को मंच पर उतारा।

कक्षा सप्तम की बहन तमन्ना, शिवांगी, पलक, प्रगती, शैलजा और सृष्टी ने ‘दुखवा मिटाइए ए छठी मैया’ गीत पर भावपूर्ण प्रस्तुति दी। वहीं, कक्षा षष्ठ की बहन नैना, अनन्या, एलिजा, रिया और श्रुति ने ‘उगे हे सूरज देवा’ पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया। कक्षा चतुर्थ की बहन आयुषी, अनुशिखा और शिवानी ने ‘राम आएंगे तो अंगना सजाएंगे’ गीत पर अपनी प्रस्तुति से समां बांध दिया। विद्यार्थियों ने छठ महापर्व के नहाय-खाय से लेकर उषा अर्घ्य तक के संपूर्ण अनुष्ठान को अत्यंत श्रद्धा एवं भावपूर्ण ढंग से मंचित किया।
इसके पश्चात विद्यालय परिसर में विशेष रूप से तैयार किए गए कृत्रिम छठ घाट पर अतिथियों एवं भैया-बहनों ने पारंपरिक पूजन सामग्री के साथ विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और भगवान भास्कर को अर्घ्य समर्पित किया।
समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानाचार्य छठु साह ने कहा कि दीपावली और छठ पर्व हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और पारिवारिक मूल्यों के आधार स्तंभ हैं। ऐसे आयोजनों से भावी पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ती है और संस्कारयुक्त शिक्षा को संबल मिलता है।
उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने कहा कि छठ महापर्व प्रकृति, स्वच्छता, अनुशासन एवं लोक आस्था का अनुपम संगम है। बच्चों द्वारा इन परंपराओं का सजीव चित्रण नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति के प्रति जागरूक और संवेदनशील बनाने में मील का पत्थर सिद्ध होगा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय के सभी आचार्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई। इस अवसर पर विद्यालय प्रबंधकारिणी समिति के पदाधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।











