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विश्व पर्यावरण दिवस पर ढोली बीज निदेशालय में वृक्षारोपण

-विश्व पर्यावरण दिवस पर ढोली बीज निदेशालय में वृक्षारोपण

-50 दिवसीय ‘क्वालिटी सीड ग्रोवर’ प्रशिक्षण का हुआ समापन

मुजफ्फरपुर, 5 जून। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बीज निदेशालय, ढोली परिसर में वृक्षारोपण कार्यक्रम एवं 50 दिवसीय “क्वालिटी सीड ग्रोवर” प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। हरियाली, कृषि नवाचार और सीखने की ऊर्जा से सराबोर इस आयोजन में अधिकारियों, प्रशिक्षणार्थियों और किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए निदेशक डॉ. डी.के. रॉय ने पर्यावरण संरक्षण और कृषि क्षेत्र में हो रहे बदलावों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन और मानव जीवन की सुरक्षा का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने किसानों और युवाओं से कृषि में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की अपील करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन और आधुनिक तकनीकों का उपयोग ही कृषि को अधिक लाभकारी बना सकता है।

उन्होंने बताया कि “क्वालिटी सीड ग्रोवर” प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रतिभागियों को बीज उत्पादन, प्रसंस्करण एवं संरक्षण की आधुनिक तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण के दौरान धान, गेहूं, मक्का, अरहर, मूंग, मसूर, चना, सरसों एवं आलू जैसी प्रमुख फसलों की वैज्ञानिक खेती की जानकारी प्रदान की गई।

इसके अलावा टमाटर, बैंगन, फूलगोभी, पत्तागोभी, मिर्च और भिंडी जैसी सब्जी फसलों की उन्नत किस्मों, बीज उपचार, पौध प्रबंधन, सिंचाई तकनीक, रोग एवं कीट नियंत्रण तथा कटाई उपरांत प्रबंधन पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया। फील्ड डेमोंस्ट्रेशन के माध्यम से किसानों को उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ाने की व्यावहारिक तकनीकों से भी अवगत कराया गया।

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. राजेश कुमार एवं डॉ. हेम चंद्र चौधरी ने किया। समापन सत्र का संचालन एवं समीक्षा डॉ. राजीव कुमार श्रीवास्तव, डॉ. विनय कुमार चौधरी एवं डॉ. श्रुति कुमारी ने संयुक्त रूप से की। इस दौरान प्रशिक्षणार्थियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कार्यक्रम को बेहद उपयोगी बताया।

किसान राम कुमार मिश्र, पवन कुमार, किशोर कुणाल एवं मुकेश कुमार ने कहा कि प्रशिक्षण के दौरान उन्हें बीज उत्पादन और फसल प्रबंधन की कई नई तकनीकों की जानकारी मिली, जिन्हें वे अपने खेतों में अपनाएंगे। उन्होंने ऐसे व्यावहारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के नियमित आयोजन की आवश्यकता भी जताई।

कार्यक्रम में मनीष कुमार, राहुल कुमार, यमन कुमार, नित्यानंद निराला, प्रमोद कुमार, अरुण कुमार एवं ब्रह्मदेव पंडित सहित अन्य कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

समापन अवसर पर सभी प्रशिक्षणार्थियों को आम, लीची एवं अन्य फलदार पौधे, सीड किट तथा प्रशिक्षण मैनुअल प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन पर्यावरण संरक्षण, उन्नत कृषि पद्धतियों और सतत विकास के संकल्प के साथ हुआ।