-लापरवाही,बन्दरा में क्रियान्वित जलजल योजना के टंकियों की नहीं हो रही नियमित सफाई
बंदरा।दीपक कुमार तिवारी।
बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सात निश्चय योजनाओं में शामिल नल जल योजना प्रखंड के विभिन्न पंचायतों के विभिन्न वार्डों में चालू तो करा दिए गए हैं। बीडीओ की लगातार प्रयास से नल जल योजना के पानी लोगों को मिल भी रहे हैं,लेकिन प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों ऐसे वार्ड हैं। जहां नल जल योजना की पानी शुद्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रखंड के ग्रामीण सूत्रों का बताना है कि प्रखंड में संचालित ज्यादातर वार्डों में नल जल योजना के टंकी की सफाई नियमित नहीं कराई जा रही है। दर्जनों ऐसे वार्ड भी हैं। जहां टंकी लगने और नल जल योजना की पानी की सप्लाई शुरू होने के बाद से अब तक करीब 1 से 3 साल तक हो गए,लेकिन अब तक वाटर टंकी की सफाई नहीं हो सकी है। लिहाजा ऐसे वार्डों में नल जल योजना से मिल रहे पानी की शुद्धता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

क्षेत्र के ग्रामीणों का बताना है भले ही प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार गांव-गांव घूमकर तथा पंचायतों में साप्ताहिक समीक्षा कर नल जल योजना के क्रियान्वयन को लेकर गंभीरता से पहल कर रहे हैं, लेकिन टंकी की सफाई नियमित कराने को लेकर ना अधिकारियों का ध्यान है और ना ही स्थानीय वार्ड सदस्य या मुखिया इस पर ध्यान देना मुनासिब समझते हैं। यह अलग बात है की बीडीओ की सख्ती के बाद विभिन्न वार्डों में नल जल योजना की सुविधा के बदले 30 रुपया मासिक शुल्क भी उपभोक्ताओं से वसूले जा रहे हैं।यह शुल्क मेंटेनेंस के नाम पर लिए जा रहे हैं, लेकिन नियमित मेंटेनेंस भी नहीं कराया जा रहा है। जिसके कारण से लोगों में असुविधा के साथ हीं नाराजगी भी है। प्रखंड के कई हिस्सों में इसको लेकर स्थानीय वार्ड सदस्य,मुखिया एवं अधिकारी के प्रति लोगों में नाराजगी बढ़ने लगी है। प्रखंड सूत्रों का बताना है कि बन्दरा प्रखंड क्षेत्र के 9 पंचायतों में नल जल योजना का क्रियान्वयन किया गया है।सिमरा, मतलुपुर एवं बन्दरा 3 पंचायतों में पीएचईडी विभाग के द्वारा वाटर टैंक बनाकर पेयजल की सुविधा बहाल कराई गई। शेष 9 पंचायतों में ग्राम पंचायत के माध्यम से नल जल योजना का क्रियान्वयन कराया गया है।शुरुआती वर्षों में नलजल योजना क्षेत्र में ज्यादातर कागजी एवं मृतप्रायः थी,लेकिन बाद के वर्षों में बीडीओ के सख्ती एवं जागरूकता अभियान के बाद इसका जमीनी क्रियान्वयन कराया गया है। जिसके अंतर्गत करीब 125 से ज्यादा वार्डों में नल जल योजना की पेयजल आपूर्ति कराई जा रही है। सूत्रों का बताना है कि यदि औचक जांच किया जाए तो प्रखंड के कई ऐसे वार्ड मिल जाएंगे। जहां पेयजल आपूर्ति के शुरुआत के बाद से अब तक टंकी की सफाई कराई ही नहीं गयी है। कई जगहों पर वाटर सप्लाई का पाइपलाइन भी टूटा पड़ा है। जिससे दूषित पानी की आपूर्ति होने की शिकायत मिल रही है। कई जगहों पर पाइप फूटी या टोंटी टूटी रहने की वजह से पानी का रिसाव भी अनावश्यक तरीके से सड़क गली या अन्य जगहों पर होने की शिकायतें मिल रही हैं।यदि अधिकारी सामने में जलापूर्ति शुरू कराकर वार्ड क्षेत्र में घूम जाएं। वाटर टँकी की खुद से जांच कर लें और लोगों से पूछताछ कर लें तो कई गड़बड़ियां खुद सामने आ जाएंगी। ग्रामीण बताते हैं कि खुद हत्था पंचायत भवन पर हीं नलजल से लगी टोंटी टूटी हुई है। जिसके कारण से पानी का रिसाव परिसर के अंदर होते रहता है।पिछले दिनों यहां जागरूकता रैली निकालकर जब बीडीओ लौटे थे तब भी टूटी हुई टोंटी से परिसर में पानी बह रहा था।पंसस पति सत्यप्रकाश ने बताया कि जब यहां यह स्थिति है तो दूसरे जगह क्या स्थिति होगी। इसका सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। इस संबंध में बंदरा के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि इस तरह की बातें उनके संज्ञान में नहीं थी। वार्ड सदस्यों के द्वारा नियमित सफाई कराने की बात बताई जा रही थी। अगले हीं पंचायत स्तरीय समीक्षा बैठकों से नल जल योजना के नियमित साफ-सफाई को लेकर अनिवार्य एवं गंभीर निर्देश दिए जाएंगे।वे खुद भी नल जल योजना के जलापूर्ति स्पॉट पर पहुंचकर टंकी की सफाई आदि का स्वयं जांच भी करेंगे। जरूरी जगह पर सामने में भी सफाई का कार्य करवाएंगे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कोताही कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसी स्थिति में लोग बीमार भी पड़ सकते हैं और ऐसे लापरवाह वार्ड सदस्य तथा जिम्मेवार लोगों को बख्शा भी नहीं जाएगा।












