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लाइव कॉल पर सीएस ने एएनएम से पूछा—”कहां हैं आप? तुरंत लोकेशन भेजिए”

-लाइव कॉल पर सीएस ने एएनएम से पूछा—”कहां हैं आप? तुरंत लोकेशन भेजिए”

-शिकायत के बाद मखदुमपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की हुई जांच
-माइक्रोप्लान भी मांगा; लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी

पटना। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के निर्देशों के बाद जिला स्तर पर भी स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति और कार्यप्रणाली की निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में पटना के दानापुर प्रखंड स्थित मखदुमपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर की कार्यप्रणाली की जांच के दौरान सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने दोपहर करीब 2:10 बजे केंद्र में पदस्थापित एएनएम मंजू कुमारी को सीधे फोन कर उनकी तत्काल लोकेशन पूछी।
फोन पर सिविल सर्जन ने एएनएम से पूछा, आप इस समय कहां हैं? अपनी लाइव लोकेशन भेजिए। साथ ही उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी की ड्यूटी नियमित केंद्र के बजाय रूटीन इम्यूनाइजेशन (आरआई) अथवा अन्य सरकारी कार्य में लगाई गई है, तो उसका माइक्रोप्लान एवं ड्यूटी संबंधी विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।
जानकारी के अनुसार, मखदुमपुर हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर में स्वास्थ्यकर्मियों की उपस्थिति को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। समाजसेवियों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद जिला स्वास्थ्य प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए औचक सत्यापन कराया।

जांच के दौरान एएनएम शांति कुमारी और मंजू कुमारी स्वास्थ्य केंद्र पर अनुपस्थित पाई गईं। जांच में यह बात भी सामने आयी की पूर्व के सीएस ने भी इस केंद्र का औचक निरीक्षण किया था। एएएनएम का चार दिनों की उपस्थिति भी काटी गयी थी। उन्होंने कहा कि मैं कभी भी कहीं भी औचक निरीक्षण करने जाऊंगा और लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य कर्मियों पर कार्रवाई करुंगा।
वहीं, सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारी (सीएचओ) अमृता कुमारी की उपस्थिति के संबंध में जिला स्वास्थ्य समिति से जानकारी ली गई। समिति के वरीय अधिकारियों ने बताया कि जब-जब सीएचओ से लाइव उपस्थिति मांगी गई, उन्होंने निर्धारित समय पर अपनी उपस्थिति सुनिश्चित की है।
सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने कहा कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए अब सीएस कार्यालय एवं जिला स्वास्थ्य समिति द्वारा किसी भी समय किसी भी स्वास्थ्यकर्मी को फोन कर लाइव उपस्थिति और लोकेशन मांगी जा सकती है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित कर्मियों से उनके कार्यक्षेत्र का माइक्रोप्लान भी प्रस्तुत करने को कहा जाएगा।
उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जांच के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही, गलत सूचना या बिना अनुमति अनुपस्थिति सामने आती है, तो संबंधित कर्मी के विरुद्ध विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग को प्रतिवेदन भेजा जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग के इस नए निगरानी तंत्र को जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने और स्वास्थ्यकर्मियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।