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बिहार में कैबिनेट विस्तार की आहट, सियासी गलियारों में तेज हुई कुर्सी की जंग

-बिहार में कैबिनेट विस्तार की आहट, सियासी गलियारों में तेज हुई कुर्सी की जंग

पटना।पश्चिम बंगाल चुनावी मतदान के बाद बिहार की सियासत में हलचल तेज हो गई है और अब सत्ता के गलियारों में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर कानाफूसी नहीं, बल्कि खुलकर चर्चा हो रही है। खबरों के मुताबिक, मई 2026 के पहले हफ्ते में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी अपने कैबिनेट का विस्तार कर सकते हैं और यह विस्तार महज़ औपचारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक समीकरणों का बड़ा खेल साबित होने वाला है। बीजेपी और जदयू दोनों खेमों में कुर्सी की जंग अपने शबाब पर है। जहां एक ओर पुराने चेहरे फिर से मंत्री पद पाने की उम्मीद में हैं, वहीं दूसरी ओर युवा विधायक दिल्ली तक लॉबिंग कर अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे हैं। जदयू में बड़े बदलाव की उम्मीद कम जरूर है, लेकिन पिछले कैबिनेट में खाली रह गए 6-7 पदों पर इस बार नए-पुराने चेहरों का संगम देखने को मिल सकता है।

बीते दौर में बीजेपी के 14 मंत्रियों ने शपथ ली थी, जिनमें सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा जैसे बड़े नाम शामिल रहे। इस बार भी पार्टी अपने कोर लीडरशिप को बनाए रखते हुए कुछ नए चेहरों को मौका देने के मूड में दिख रही है। जदयू सूत्रों के मुताबिक, अधिकतर पुराने मंत्री रिपीट हो सकते हैं, लेकिन विभागों में फेरबदल तय माना जा रहा है।

सियासी गलियारों में यह भी चर्चा है कि अगर जदयू पूरा कोटा भरता है, तो महेश्वर हजारी, शीला मंडल, संतोष निराला जैसे नामों की किस्मत चमक सकती है। वहीं नए चेहरों में चेतन आनंद, रूहेल रंजन और मृत्युंजय कुमार जैसे नाम उभरते सितारे बनकर सामने आ रहे हैं। छोटे सहयोगी दलों में भी हलचल कम नहीं है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा से संतोष सुमन का नाम लगभग तय माना जा रहा है, जबकि अन्य दलों में फिलहाल बड़ा बदलाव मुश्किल दिख रहा है। दिलचस्प मोड़ यह है कि महागठबंधन में संभावित टूट को ध्यान में रखते हुए कुछ सीटें खाली रखी जा सकती हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर सियासी बारगेनिंग की जा सके।

कुल मिलाकर, बिहार की राजनीति एक बार फिर शतरंज की बिसात बन चुकी है जहां हर चाल सोच-समझकर चली जा रही है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सम्राट चौधरी किसे सत्ता की कुर्सी पर बिठाते हैं और किसे बाहर का रास्ता दिखाते हैं।