बिहार में ‘काम’ और ‘नाकामी’ में फंसी सियासत,
-2025 के लिए नीतीश-तेजस्वी का एक ही दांव
संवाददाता। पटना।
बिहार में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर की यात्रा का साल पूरा होने जा रहा है। 2 अक्तूबर 2023 को उन्होंने गांधी की कर्मभूमि चंपारण से जन सुराज यात्रा शुरू की थी। इस साल 2 अक्तूबर को यात्रा पूरी करने के बाद प्रशांत किशोर अपनी पार्टी की विधिवत घोषणा करेंगे। आरजेडी नेता और पूर्व डेप्युटी सीएम तेजस्वी यादव 10 सितंबर से बिहार में आभार यात्रा पर निकले हुए हैं। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने 25 सितंबर से बिहार यात्रा निकालने की घोषणा की है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार भी यात्रा प्लान कर रहे हैं। हालांकि जेडीयू ने इसकी तारीख अभी तक घोषित नहीं की है।
नीतीश की यात्रा जब हो, लोकेन जिस तरह सरकारी योजनाओं के उद्घाटन, शिलान्यस या निरीक्षण के लिए नीतीश राज्य भर में घूम रहे हैं, वह उनकी किसी सुनियोजित यात्रा से कम नहीं है। भाजपा नेता भी सदस्यता अभियान के लिए जिलों का दौरा कर रहे हैं। लोजपा (आर) के नेता चिराग पासवान ने तो बिना कोई नाम दिए अपनी यात्रा शुरू कर दी है। रुक-रुक कर होने वाली उनकी यात्रा में सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करने की योजना है। अभी तक वे बेगूसराय के मटिहानी और शेखपुरा का दौरा कर चुके हैं।
दरअसल बिहार में राजनीतिक दलों की सरगर्मी इसलिए बढ़ गई है कि सबको समय से पहले विधानसभा चुनाव की उम्मीद है। नीतीश कुमार तो यह मांग लोकसभा चुनाव के वक्त से ही कर रहे हैं। नीतीश की सक्रियता देख सबको यह लगने लगा है कि शायद चुनाव जल्द हो जाए। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर इस तरह का कोई संकेत नहीं मिला है। यात्राओं में सबसे अधिक चर्चित प्रशांत किशोर का दौरा रहा है। साल भर में उन्होंने तकरीबन बिहार के सभी जिलों की यात्रा कर ली है। यात्रा के क्रम में ही उन्होंने संगठन का ढांचा भी खड़ा कर लिया है। अभी तक उनके कई सम्मेलन भी पटना में हो चुके हैं। बड़ा कार्यक्रम वे 2 अक्टूबर को करने वाले हैं। उसी दिन वे ‘जन सुराज’ को पार्टी के रूप में लांच करेंगे।
दूसरी चर्चित यात्रा तेजस्वी यादव की बन रही है। यात्रा के क्रम में तेजस्वी, नीतीश कुमार की आलोचना तो कर ही रहे हैं, कई विस्फोटक बयानों से उन्होंने सियासी हंगामा खड़ा कर दिया है। उन्होंने यात्रा के दौरान ही उन्होंने भाजपा से तंग आकर लालू यादव और राबड़ी देवी के सामने नीतीश कुमार के गिड़गिड़ाने की बात कह दी। इसके बाद बिहार में आरजेडी और जेडीयू के बच वीडियो वार शुरू हो गया है। चिराग की यात्रा भी विस्फोटक ही है। वे अपनी यात्रा में अभी तक दो जगहों पर गए हैं और वहां विधानसभा के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा भी कर दी है।

एनडीए के दोनों प्रमुख घटक दल- जेडीयू और भाजपा उस तरह से आक्रामक अभी नहीं हुए हैं, जैसे दूसरे दलों में सुगबुहाट शुरू हो गई है। सच यह है कि हर दल के सिरमौर जनता के बीच जाकर परसेप्शन बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि सबसे बढ़िया वे ही हैं। मूल रूप से बिहार में परसेप्शन की लड़ाई नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर के बीच है। चिराग पासवान भी एक ध्रुव बनने की कोशिश कर रहे हैं। परसेप्शन की इस लड़ाई में नीतीश लगातार सीएम रहने के कारण अब भी सब पर भारी हैं, लेकिन शराबबंदी, जमीन सर्वे और अफसरशाही जैसे मुद्दे उनके लिए सिरदर्द साबित हो सकते हैं। यही वजह है कि प्रशांत किशोर जमीन सर्वे का विरोध कर रहे हैं। शराबबंदी को विफल बता कर वे उसे खत्म करने की बात कह रहे हैं। प्रशांत इस तरह लोगों से वादे कर रहे हैं, जैसे उनको अपनी सरकार बनने का पूरा भरोसा है। तेजस्वी अभी कोई वादा तो नहीं कर रहे हैं, लेकिन जिस तरह रोजगार और अपराध को उन्होंने मुद्दा बनाया है, उससे लगता है कि वे ‘इंडिया ब्लॉक’ की सरकार बन जाने के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हैं।
नीतीश कुमार को अब तक बिहार के लिए किए अपने काम पर भरोसा है। उन्हें आधी आबादी पर भी पूरा यकीन है, जिसकी बात मान कर पहले उन्होंने महिला सशक्तिकरण के लिए पंचायतों के प्रतिनिधि बनने से लेकर नौकरी तक में अच्छा खासा आरक्षण दिया। महिलाओं की बात मान कर ही उन्होंने शराबबंदी की। दलितों की दो श्रेणी बना कर उनके लिए सरकारी योजनाएं बनाईं। पसमांदा मुसलमानों पर डोरे डालने के लिए दो बार उन्होंने इस जमात के नेता अली अनवर को राज्यसभा भी भेजा था। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए नीतीश के काम सभी याद करते हैं। पर, नीतीश के सामने एनडीए के नेता ही संकट खड़ा करते रहे हैं। जीतन राम मांझी लगातार शराबबंदी का मखौल उड़ाते रहे हैं। चिराग पासवान तो साथ रह कर भी उनसे दुश्मनी का शाश्वत भाव बनाए हुए हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में तो उन्होंने नीतीश को नुकसान पहुंचाया ही, इस बार भी वे वैसा ही करते दिख रहे हैं।












