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बाढ़ की भयावह तस्वीर, श्मशान डूबे तो हाईवे किनारे होने लगा अंतिम संस्कार

-बाढ़ की भयावह तस्वीर, श्मशान डूबे तो हाईवे किनारे होने लगा अंतिम संस्कार

सारण। बिहार में बाढ़ का कहर अब लोगों के घर, खेत और सड़कों तक सीमित नहीं रह गया है। सारण जिले में बाढ़ के पानी ने कई श्मशान घाटों को भी जलमग्न कर दिया है। हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को अपनों की अंतिम विदाई के लिए नेशनल हाईवे के किनारे सूखी जमीन तलाशनी पड़ रही है। यह मंजर बाढ़ की भयावहता और लोगों की मजबूरी को बयां कर रहा है।
अवतारनगर थाना क्षेत्र के गोराईपुर-बोधा छपरा गांव के सामने फोरलेन हाईवे का किनारा इन दिनों मजबूर लोगों के लिए श्मशान बन गया है। गुरुवार को बोधा छपरा टोल नाके के पास एक साथ तीन शवों का अंतिम संस्कार किया गया। हाईवे से गुजर रहे वाहन चालकों की नजर जब सड़क किनारे जलती चिताओं पर पड़ी तो कई लोग भी ठिठक गए। बाढ़ की इस त्रासदी के बीच अंतिम संस्कार का यह दृश्य हर किसी को झकझोर देने वाला था।
सारण के आधा दर्जन से अधिक प्रखंडों के लोग आमतौर पर गंगा घाट और पिपरा गंगा घाट पर अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करते हैं। लेकिन गंगा का पानी घाटों तक पहुंच जाने और श्मशान स्थलों के जलमग्न होने के कारण लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। दुख में डूबे परिवारों को अब अंतिम संस्कार के लिए हाईवे किनारे सूखी जमीन का सहारा लेना पड़ रहा है।


गंगा, सरयू, सोन और गंडक नदियों के बढ़ते जलस्तर से सारण के दियारा और तटीय इलाकों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। छपरा सदर प्रखंड की रायपुर, बिदगावां, कोटवापट्टी रामपुर और बड़हरा महाजी पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। कई ग्रामीण इलाकों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है और लोगों को आवाजाही के लिए नाव का सहारा लेना पड़ रहा है।
गड़खा प्रखंड के मौजमपुर, फुलवारिया टोला, पकवलिया टोला, संठा और रामू टोला में भी जलजमाव से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। कई घरों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है, जबकि धनौरा बाजार चारों तरफ से पानी से घिर गया है। मकेर के दियारा इलाके में गंडक नदी के पानी ने धान की फसल को प्रभावित किया है और करीब आधा दर्जन गांव पानी से घिरे बताए जा रहे हैं।
मांझी में सरयू नदी का पानी बढ़ते हुए प्रसिद्ध रामघाट के पास मछली बाजार तक पहुंच गया है। पानी बढ़ने के कारण दुकानदारों को अपना कारोबार छोड़कर ऊंचे स्थानों पर जाने को मजबूर होना पड़ा है। सरयू की सहायक दाहा नदी भी उफान पर है, जिससे चेफुल, मटियार, महम्मदपुर और मुबारकपुर पंचायतों के निचले इलाकों में पानी फैल गया है।
वहीं, सोधी नदी का पानी रिविलगंज के मोहब्बत परसा तथा मांझी के बंरगा, मरहा और सोनवर्षा पंचायतों में प्रवेश कर गया है। कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित और ऊंचे स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं।
बाढ़ का पानी भले ही कुछ समय बाद उतर जाए और हाईवे किनारे जली चिताएं बुझ जाएं, लेकिन अपनों को अंतिम विदाई देने के लिए सड़क किनारे मजबूर हुए परिवारों का यह दर्द लंबे समय तक लोगों के जेहन में बना रहेगा। यह तस्वीर बताती है कि बाढ़ ने लोगों से सिर्फ रहने की जमीन ही नहीं छीनी, बल्कि कई जगहों पर उन्हें अपनों को सम्मानजनक अंतिम विदाई देने के लिए भी संघर्ष करने पर मजबूर कर दिया है।