-‘प्रकृति के संरक्षण के बिना प्रभु का नाम अधूरा’ : पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी
जनकपुरधाम से मिश्री लाल मधुकर।
पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनजागरूकता फैलाने के उद्देश्य से पद्मभूषण पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने शुक्रवार, 2 अक्टूबर को जनकपुरधाम स्थित जानकी मंदिर से 52 दिवसीय साइकिल यात्रा की शुरुआत की। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता कमला अभियानी कमला पुत्र विक्रम यादव ने की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. जोशी ने कहा कि प्रकृति के संरक्षण के बिना प्रभु का नाम भी अधूरा है। उन्होंने कहा कि साइकिल यात्रा का मुख्य उद्देश्य नदियों, जलस्रोतों, जंगलों और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि मनुष्य अपने निजी स्वार्थ के लिए प्राकृतिक संसाधनों का लगातार दोहन कर रहा है, जिसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।

डॉ. जोशी ने ग्लोबल वार्मिंग, ग्लेशियरों के पिघलने और प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि केदारनाथ में बादल फटने की घटना तथा हाल में भोटेकोशी नदी से नुवाकोट और रसुवा जिलों में आई बाढ़ जैसी घटनाओं से सबक लेने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करना मानव की जिम्मेदारी है, न कि उनका विनाश करना।
उन्होंने कहा कि माता जानकी की भूमि जनकपुरधाम से शुरू हुई यह साइकिल यात्रा प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ जागरूकता का संदेश देगी। उन्होंने साइकिल को पर्यावरण के अनुकूल परिवहन साधन बताते हुए कहा कि कई देशों में लोग साइकिल से कार्यालय तक जाते हैं।
‘प्रकृति ही प्रभु है’ संदेश के साथ शुरू हुई यह 52 दिवसीय यात्रा जनकपुरधाम से मधुबनी, दरभंगा, बेगूसराय, मुंगेर और बक्सर होते हुए उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान से गुजरकर उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में समाप्त होगी। यात्रा में कुल 20 लोग शामिल हैं, जिसमें 15 वर्षीय एक बच्ची भी शामिल है।
मधेश प्रदेश के गवर्नर डॉ. सुरेन्द्र लाभ कर्ण ने नेपाली झंडा दिखाकर साइकिल यात्रियों को जानकी मंदिर से रवाना किया। उन्होंने कहा कि डॉ. जोशी की यह पहल नेपाल और भारत के लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहायक होगी।
कार्यक्रम में पर्यटन मंत्री कनिष पटेल, ऊर्जा, सिंचाई एवं खानेपानी मंत्री कुशवाहा, जानकी मंदिर के उत्तराधिकारी महंत राम रोशन दास वैष्णव सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।











