– पेश की हिंदू-मुस्लिम एकता की मिशाल, ग्रामीण ने मदरसा भवन को स्कूल को सौंपा
मुजफ्फरपुर(बिहार)। दीपक कुमार तिवारी।
हिंदू-मुस्लिम आपसी सौहार्द की मिसाल पेश करते हुए मुजफ्फरपुर जिले के बन्दरा प्रखंड के बैंगरी के ग्रामीणों ने एक बेहतर पहल की है। यहां कई साल पुरानी मदरसा के भवन को पड़ोसी उत्क्रमित मध्य विद्यालय बैंगरी को बच्चों के शैक्षणिक कार्य के निमित्त समर्पित कर दिया गया है। ग्रामीणों के सहमति के आधार पर यह फैसला लिया गया। इसके पहले ग्रामीणों की एक बैठक बुलाई गई। जिसमें सर्व सम्मत प्रस्ताव के बाद यह मदरसा भवन विद्यालय को समर्पित कर दिया गया। इस संदर्भ में ग्रामीण सह पंचायत के पूर्व सरपंच तबस्सुम आरा ने बताया कि काफी समय पहले से वह मदरसा चलाती थी। हाल के वर्षों में तकनीकी कारणों से मदरसा का संचालन नहीं हो पा रहा था। मदरसा भवन बन्द पड़ा हुआ था। इस बीच पड़ोस में स्थित प्राथमिक विद्यालय के मध्य विद्यालय में उत्क्रमित होने के बावजूद शैक्षणिक माहौल एवं संसाधनिक स्थिति ठीक नहीं थी,लोग निराश थे, लेकिन हाल के महीने में शिक्षकों की सक्रियता की वजह से गुणोत्तर परिवर्तन हुआ। स्कूल के रंग-रोगन एवं जीर्णोद्धार कार्य कराए गए।शिक्षकों की सक्रियता से शैक्षणिक माहौल बेहतर हुआ।इससे बच्चों के साथ ग्रामीणों में उत्साह देखा गया। ग्रामीणों की सहमति बनी और पास में बंद पड़े मदरसा भवन को विद्यालय को सौंप देने का सर्वसम्मत सहमति बनी।इसके बाद यह मदरसा भवन विद्यालय को शैक्षणिक कार्यों के निमित्त समर्पित कर दिया गया ।

ग्रामीण मोहम्मद असलम ने बताया कि चूंकि मदरसा और स्कूल दोनों का मकसद एक ही है। गांव के बच्चों को शिक्षा अर्जन कराना और बच्चों के पढ़ने की निमित्त ही दोनों का निर्माण और संचालन कराया जाता है। लिहाजा बच्चों के हित में शैक्षणिक कार्यों को और बेहतर करने में सहयोग के उद्देश्य से मदरसा भवन भी विद्यालय को समर्पित कर दिया गया है ताकि और बेहतर तरीके से बच्चों के पढ़ाई में मदद मिल सके। इस दौरान विद्यालय के प्रधानाध्यापक ब्रजेश कुमार ने बताया कि विद्यालय में विद्यालय कोस तथा उन्होंने खुद के निजी वेतन की राशि को मिलाकर बेहतर तरीके से अपूर्व जीर्णोद्धार कार्य कराया है। विद्यालय में शैक्षणिक माहौल बेहतर करने का उन्होंने पूरा प्रयास किया है। हाल के महीना में ही उन्होंने विद्यालय का प्रभार लिया है और इस बीच अपना विशिष्ट योगदान देने तथा कुछ अलग करने के उद्देश्य से लगातार प्रयासरत हैं।इसमें ग्रामीणों का भी सहयोग मिला है। गांव वाले ने सहमति बनाकर पूर्व सरपंच तबस्सुमारा के नेतृत्व में मदरसा भवन उन्हें सौंपा है। विद्यालय के तीन कक्षाओं को तत्काल मदरसा भवन में शिफ्ट कर दिया गया है। मदरसा भवन को भी बाहर -भीतर विद्यालय के रंगों में रंग रोगन कराया गया है।जिसके बाद शैक्षणिक कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया गया है। ग्रामीण के इस पहल की इलाके में खूब तारीफ हो रही है। लोग इससे काफी खुश हैं। हिंदू-मुस्लिम सामूहिक एकता की मिसाल के रूप में लोग तारीफ कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि इस बात की जानकारी विभाग के वरीय अधिकारियों को भी दे दी गई है। ज्ञात हो कि विद्यालय परिसर और भवन तकनीकी कारणों से पहले से ही काफी शिकस्त जगह में है।जिससे विद्यालय की गतिविधियों में कई तरह की परेशानी होती रही है। ऐसे में मदरसा भवन मिलने से काफी स्पेस भी बढ़ा है। बच्चों को भी विभिन्न गतिविधियों में शामिल होने में, शैक्षणिक माहौल बनाने में, कैंपस सुरक्षा की दृष्टिकोण से भी और भवन निर्माण की दृष्टिकोन से भी काफी जगह मिली है। लिहाजा शिक्षक एवं छात्रों में काफी उत्साह का माहौल है। शिक्षकों ने बताया कि पहली से आठवीं तक के बच्चों की पढ़ाई इस विद्यालय में की जाती है।स्कूल में 312 बच्चे विभिन्न कक्षाओं में नामांकित है।












