-पूसा कृषि विश्वविद्यालय में श्रमिकों के शोषण का आरोप, ठेका प्रथा खत्म कर स्थायी करने की मांग
-18 दिन के बजाय 26 दिन काम और पूरी न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित करने की उठाई आवाज, आंदोलन की चेतावनी
पूसा/समस्तीपुर, 30 अक्टूबर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा में वर्षों से कार्यरत सैकड़ों श्रमिकों और रात्रि सुरक्षा प्रहरियों के रोजगार एवं मजदूरी का मुद्दा उठाते हुए भाकपा-माले जिला कमिटी सदस्य सह पूर्व जिला परिषद प्रत्याशी रौशन कुमार ने विश्वविद्यालय प्रशासन से एजेंसी, ठेका और आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त करने की मांग की है। उन्होंने श्रमिकों को स्थायी रोजगार देने, महीने में 26 दिन काम उपलब्ध कराने और निर्धारित न्यूनतम मजदूरी का पूरा भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की।
रौशन कुमार ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के शैक्षणिक एवं प्रशासनिक भवनों, प्रयोगशालाओं, छात्रावासों, डेयरी फार्म, कृषि अनुसंधान प्रक्षेत्र, बागवानी, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था सहित विभिन्न कार्यों में सैकड़ों श्रमिक वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें स्थायी रोजगार और पर्याप्त काम नहीं मिल रहा है। उन्होंने महीने में महज 18 दिन काम देने की व्यवस्था को श्रमिकों के साथ अन्याय बताते हुए इसे समाप्त करने की मांग की।

उन्होंने एजेंसियों के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों की मजदूरी में कथित कटौती की शिकायतों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा कि एजेंसियों को श्रमिकों के भुगतान के लिए कितनी राशि दी जाती है और वास्तविक रूप से श्रमिकों को कितनी मजदूरी मिलती है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और भुगतान का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की।
रौशन कुमार ने केंद्र और बिहार सरकार से सवाल किया कि जब श्रमिकों के अधिकारों और न्यूनतम मजदूरी की गारंटी की बात की जाती है, तो केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में वर्षों से काम कर रहे श्रमिक रोजगार की असुरक्षा के बीच काम करने को मजबूर क्यों हैं। उन्होंने नियमित प्रकृति के कार्यों से ठेका प्रथा समाप्त करने, पात्र श्रमिकों को नियमानुसार स्थायी करने तथा सभी श्रमिकों और रात्रि सुरक्षा प्रहरियों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ देने की मांग की।
उन्होंने कहा कि श्रमिकों को संगठित कर विश्वविद्यालय के कुलपति के समक्ष उनकी मांगें रखी जाएंगी। प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक पहल नहीं की तो भाकपा-माले श्रमिकों के अधिकारों के लिए आंदोलन तेज करेगी।












