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पटना में गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन बाढ़ का संकट बरकरार; मरीन ड्राइव की 500 से ज्यादा दुकानें पानी में

-पटना में गंगा का जलस्तर घटा, लेकिन बाढ़ का संकट बरकरार; मरीन ड्राइव की 500 से ज्यादा दुकानें पानी में

पटना। राजधानी पटना में गंगा का जलस्तर अब धीरे-धीरे नीचे उतरने लगा है, जिससे लोगों को थोड़ी राहत मिली है। हालांकि, बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दियारा और निचले तटीय इलाकों में अब भी पानी जमा है। वहीं, राजधानी के प्रमुख फूड हब माने जाने वाले जेपी गंगा पथ यानी मरीन ड्राइव के किनारे लगी सैकड़ों दुकानें भी बाढ़ के पानी की चपेट में आ गई हैं। 500 से ज्यादा दुकानों तक पानी पहुंचने की बात सामने आई है। कई दुकानदारों का सामान भी पानी में डूब गया है।
बाढ़ नियंत्रण विभाग की शुक्रवार सुबह छह बजे की रिपोर्ट के अनुसार, मनेर में गंगा का जलस्तर पिछले 24 घंटे में 16 सेंटीमीटर नीचे आया है। यहां जलस्तर 52.12 मीटर दर्ज किया गया। हालांकि, यह अब भी खतरे के निशान 52 मीटर से 12 सेंटीमीटर ऊपर है। ऐसे में जलस्तर में गिरावट के बावजूद खतरा पूरी तरह टला नहीं है।
दीघा घाट पर भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास बना हुआ है और 52.12 मीटर दर्ज किया गया है। वहीं गांधी घाट पर पिछले तीन दिनों में करीब 30 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है। इसके बावजूद यहां जलस्तर 49.28 मीटर है, जो खतरे के निशान 48.60 मीटर से 68 सेंटीमीटर ऊपर है।
गंगा के जलस्तर में गिरावट का असर राजधानी के जेपी गंगा पथ पर भी दिखाई दे रहा है। दीघा घाट के आसपास गंगा का पानी करीब आधा किलोमीटर तक नजदीक आ गया है। मरीन ड्राइव के किनारे लगी सैकड़ों दुकानें पानी से घिर गई हैं। पानी बढ़ने के कारण दुकानदारों को ठेले और सामान को सुरक्षित स्थानों पर ले जाना पड़ रहा है।


कई कारोबारियों का सामान पानी में डूब जाने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है। दुकानदार अब ऐसी जगह तलाश रहे हैं, जहां पानी से बचते हुए दोबारा कारोबार शुरू किया जा सके। हालांकि, पटना नगर निगम की ओर से कहा गया है कि फिलहाल मरीन ड्राइव के दुकानदारों के लिए निगम की तरफ से कोई अलग निर्देश जारी नहीं किया गया है।
उधर, गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद दियारा क्षेत्रों में हालात सामान्य नहीं हुए हैं। खुसरूपुर के दियारा इलाके में गंगा का पानी घाट से एक किलोमीटर से अधिक दूरी तय कर बैकुंठ धाम मंदिर के पास तक पहुंच गया है। दानापुर के तटवर्ती इलाकों में भी पानी जमा है। हालांकि, जलस्तर कम होने के साथ पानी धीरे-धीरे निकल रहा है, जिससे लोगों को कुछ राहत मिल रही है।
बख्तियारपुर में स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है। वहीं मोकामा में गंगा के जलस्तर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन अभी स्थिति नियंत्रण में है।
बाढ़ का खतरा केवल गंगा तक सीमित नहीं है। सोन और पुनपुन नदी के जलस्तर पर भी लगातार नजर रखी जा रही है। सोन नदी के कोइलवर में जलस्तर 52.80 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 55.52 मीटर है। यहां पानी घटने का रुझान है।
पुनपुन नदी के श्रीपालपुर में जलस्तर 49.10 मीटर रहा, जो खतरे के निशान 50.60 मीटर से 1.50 मीटर नीचे है। यहां स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। हालांकि, अरवल के किंजर में पुनपुन नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके चलते दक्षिणी पटना के निचले इलाकों में विशेष निगरानी की जरूरत बनी हुई है।
फिलहाल गंगा के घटते जलस्तर से पटना और आसपास के इलाकों को थोड़ी राहत जरूर मिली है, लेकिन दियारा और निचले क्षेत्रों में जमा पानी, मरीन ड्राइव की जलमग्न दुकानें और सोन-पुनपुन नदियों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव साफ संकेत दे रहे हैं कि बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। जल संसाधन विभाग की ओर से तटबंधों और संवेदनशील इलाकों की निगरानी लगातार जारी रखी जा रही है।