-ढोली में अनुसूचित जाति कृषकों के लिए प्रशिक्षण-सह-गोष्ठी, कृषि यंत्र व बीज वितरण से सशक्तिकरण की पहल
मुजफ्फरपुर। बुधवार को तिरहुत कृषि महाविद्यालय, ढोली के सभागार में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) – राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान, नई दिल्ली द्वारा अनुसूचित जाति उप-योजना के अंतर्गत एक दिवसीय “प्रशिक्षण-सह-किसान गोष्ठी एवं कृषि उपादान वितरण कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में लगभग 300 अनुसूचित जाति वर्ग के कृषक और महिला कृषकों ने भाग लिया।
इस अवसर पर प्रतिभागियों के बीच मक्का, मड़ुआ एवं सांवा के बीज, कुदाल, खुरपी, हंसिया जैसे कृषि यंत्र और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर उनकी कृषि उत्पादकता, दक्षता और आय को बढ़ाना था।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. पी. पी. सिंह, अधिष्ठाता, तिरहुत कृषि महाविद्यालय ने की। उन्होंने भा.कृ.अनु.प. की इस पहल को सामाजिक समावेशन की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम बताया। डॉ. डी. के. राय, निदेशक, बीज निदेशालय, पूसा ने बीज उत्पादन, उपचार और गुणवत्ता पर जानकारी दी, वहीं डॉ. सुबोध कुमार सिंहा ने अनुसूचित जाति कृषकों के लिए जैव प्रौद्योगिकी आधारित समाधान प्रस्तुत किए।

मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मोनिका दलाल ने महिला कृषकों को मशरूम उत्पादन, पोषण वाटिका और जैविक खाद निर्माण की जानकारी दी। डॉ. जसदीप सी. पदारिया ने कार्यक्रम के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों को रेखांकित किया।
विषय विशेषज्ञों द्वारा कई सत्रों में मक्का, कंद फसलें, बीज जनित रोग, पोषण कृषि, और जैविक खेती जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एस. के. सिंह ने किया और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. के. के. सिंह ने प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर विभिन्न वैज्ञानिकों, तकनीकी सहायकों, प्रशासनिक कर्मियों एवं छात्र प्रतिनिधियों ने सक्रिय सहभागिता निभाई, जिससे कार्यक्रम को तकनीकी और सामाजिक रूप से व्यापक आयाम मिला।
यह आयोजन अनुसूचित जाति समुदाय के लिए वैज्ञानिक मार्गदर्शन और कृषि सशक्तिकरण की दिशा में एक उल्लेखनीय प्रयास बनकर सामने आया।











