-सम्राट कैबिनेट में सामाजिक संतुलन की झलक, कई नए चेहरों को मिला मौका
पटना, 7 मई 2026। बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। नए मंत्रिमंडल में विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है। कई अनुभवी नेताओं के साथ-साथ पहली बार मंत्री बने चेहरों को भी जगह दी गई है।
मंत्रिमंडल में मल्लाह समाज से रमा निषाद और मदन सहनी को प्रतिनिधित्व मिला है। औराई विधायक रमा निषाद को तिरहुत क्षेत्र में निषाद समाज का मजबूत चेहरा माना जाता है। वहीं बहादुरपुर विधायक मदन सहनी पहले भी समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं और सहनी समाज के बड़े नेताओं में गिने जाते हैं।
शिवहर विधानसभा क्षेत्र से पहली महिला विधायक बनीं डॉ. श्वेता गुप्ता ने मंत्री बनकर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। करीब ढाई दशक बाद शिवहर जिले को बिहार मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला है। पेशे से चिकित्सक डॉ. श्वेता गुप्ता ने 2025 में इतिहास रचते हुए शिवहर से जीत दर्ज की थी।
जगदीशपुर विधायक भगवान सिंह कुशवाहा को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वे पहले भी बिहार सरकार में मंत्री रह चुके हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों में सक्रिय भूमिका निभा चुके भगवान सिंह कुशवाहा को क्षेत्रीय राजनीति का अनुभवी चेहरा माना जाता है।
झाझा विधायक दामोदर रावत पहली बार मंत्री बने हैं। संगठनात्मक राजनीति से उभरे दामोदर रावत जदयू के भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते हैं। वहीं महादलित समाज से आने वाले सोनबरसा विधायक रतनेश सदा को भी मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है। रतनेश सदा पहले मद्य निषेध विभाग संभाल चुके हैं और संघर्षपूर्ण जीवन यात्रा के कारण खास पहचान रखते हैं।

फुलपरास विधायक शीला कुमारी मंडल और पूर्णिया क्षेत्र की प्रभावशाली नेता लेसी सिंह को भी कैबिनेट में जगह मिली है। दोनों नेताओं को पूर्व में कई महत्वपूर्ण विभागों का अनुभव रहा है। लेसी सिंह लगातार कई चुनाव जीतकर जदयू की मजबूत महिला चेहरों में शामिल रही हैं।
सम्राट कैबिनेट में यादव समाज से रामकृपाल यादव और उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को प्रमुख प्रतिनिधित्व मिला है। वहीं भोरे विधायक और पूर्व आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार को प्रशासनिक अनुभव का लाभ मिला है। उन्होंने पूर्व में शिक्षा और तकनीकी विभाग जैसे मंत्रालय संभाले हैं।
गोपालपुर विधायक शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल पहली बार मंत्री बने हैं। अंग-सीमांचल क्षेत्र में वे पिछड़ी राजनीति के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। नालंदा के वरिष्ठ नेता श्रवण कुमार को भी मंत्रिमंडल में स्थान मिला है। वे लंबे समय से बिहार की राजनीति में सक्रिय हैं और कई विभागों का अनुभव रखते हैं।
डॉ. अशोक चौधरी को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है। वे पूर्व में शिक्षा, भवन निर्माण और ग्रामीण कार्य विभाग संभाल चुके हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार ने पहली बार मंत्री पद की शपथ लेकर सक्रिय राजनीति में औपचारिक एंट्री की है।
रामनगर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार विधायक बने नंदकिशोर राम को भी मंत्री बनाया गया है। उनके मंत्री बनने से बगहा अनुमंडल क्षेत्र में भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में उत्साह का माहौल है।
इधर, पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। मशरक क्षेत्र के कुछ लोगों ने इसे लेकर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिप्पणी की है।











