-चिराग पासवान का बड़ा ऐलान: “बिहार की सभी 243 सीटों पर लड़ूंगा चुनाव”, NDA में सीट शेयरिंग पर बढ़ा सस्पेंस
✍🏻 पटना/छपरा। विशेष रिपोर्ट।
बिहार में सितंबर-अक्टूबर में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सीटों के बंटवारे को लेकर एनडीए और महागठबंधन में खींचतान चरम पर है। ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने रविवार को छपरा की जनसभा में बड़ा ऐलान कर सियासी हलचल तेज कर दी।
जनसभा में चिराग पासवान ने स्पष्ट शब्दों में कहा,
> “मैं बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ूंगा। मैं लड़ूंगा बिहारियों के लिए, अपने भाइयों, माताओं और बहनों के लिए, ताकि एक नया और विकसित बिहार बनाया जा सके।”
हालांकि बाद में उन्होंने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह NDA का हिस्सा बने रहेंगे और यह लड़ाई एनडीए के बैनर तले ही होगी। उन्होंने कहा,
> “हर सीट पर चिराग पासवान खड़ा होगा, लेकिन एनडीए के उम्मीदवार के रूप में।”
प्रेशर पॉलिटिक्स और सीट शेयरिंग पर दबाव:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चिराग पासवान का यह बयान एनडीए में ज्यादा सीटें पाने की रणनीति का हिस्सा है। वह बार-बार इस तरह के बयान देकर अपने लिए सीटों की संख्या बढ़ाने का माहौल बना रहे हैं। इस बयान को ‘प्रेशर पॉलिटिक्स’ के रूप में देखा जा रहा है।
विपक्ष पर भी साधा निशाना:
चिराग पासवान ने विपक्ष पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि

> “जो लोग आज विकास की बात करते हैं, वही 90 के दशक में बिहार को बर्बाद करने वाले लोग हैं।”
उन्होंने ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का संकल्प दोहराते हुए कहा कि वे रोजगार के मुद्दे पर लड़ाई लड़ेंगे, ताकि किसी बिहारी को रोजी-रोटी के लिए अपने राज्य से बाहर न जाना पड़े।
आरक्षण पर दिया भावुक बयान:
अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत को याद करते हुए चिराग ने आरक्षण पर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा,
> “जब तक चिराग पासवान जिंदा है, तब तक कोई भी ताकत आरक्षण को खत्म नहीं कर सकती। ये अफवाहें फैलाई जा रही हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है।”
क्या है रणनीति?
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार चिराग पासवान की यह आक्रामक शैली और ‘हर सीट पर लड़ने’ की घोषणा सीट बंटवारे से पहले दबाव बनाने की रणनीति हो सकती है। एनडीए में पहले से ही सीटों को लेकर जटिलता बनी हुई है, और चिराग का यह रवैया आने वाले दिनों में गठबंधन की बातचीत को और पेचीदा बना सकता है।
बिहार की सियासत में चिराग पासवान एक बार फिर खुद को मजबूत खिलाड़ी के रूप में पेश कर रहे हैं — अब देखना यह होगा कि एनडीए में उनकी बात कितनी मानी जाती है, और इस बार उन्हें कितनी सीटों पर संतोष करना पड़ता है।












