-CBSE में मैथिली को मातृभाषा विषय की मान्यता, बिहार के लिए बड़ी उपलब्धि; सम्राट चौधरी ने जताया आभार
पटना: बिहार और विशेष रूप से मिथिला क्षेत्र के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता देने का फैसला किया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के अनुरूप लिए गए इस निर्णय के तहत शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 1 से माध्यमिक स्तर यानी कक्षा 10 तक मैथिली भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
जानकारी के अनुसार, केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री जयंत चौधरी ने सांसद गोपालजी ठाकुर को पत्र लिखकर बताया है कि CBSE पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से 8वीं तक मैथिली भाषा को मातृभाषा विषय के रूप में मान्यता प्रदान कर दी गई है। यह कदम मातृभाषा आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय भाषाओं को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा 5 तक तथा संभव हो तो कक्षा 8 तक विद्यार्थियों को मातृभाषा में शिक्षा देने पर जोर दिया गया है। इसी क्रम में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) संविधान की 22 अनुसूचित भाषाओं, जिनमें मैथिली भी शामिल है, में पाठ्यपुस्तकों का अनुवाद कर रही है।

इस फैसले से मिथिला क्षेत्र समेत देशभर के मैथिली भाषी छात्रों को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपरा से जुड़ने का अवसर मिलेगा। साथ ही शुरुआती शिक्षा मातृभाषा में मिलने से विद्यार्थियों के सीखने की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है।
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मातृभाषा मैथिली को शिक्षा व्यवस्था में मजबूत स्थान दिलाने की दिशा में यह फैसला ऐतिहासिक और स्वागतयोग्य है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय न केवल मैथिली भाषा को नई पहचान और सम्मान देगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को अपनी मातृभाषा, संस्कृति और जड़ों से जोड़ने का भी मजबूत माध्यम बनेगा।
शिक्षा मंत्रालय और CBSE का यह कदम भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और क्षेत्रीय भाषाई विरासत को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है।












