-बन्दरा में प्रखण्ड पंचायत समिति सदस्यों की बैठक आयोजित,गहमागहमी के बीच दर्जनों प्रस्ताव पारित
बंदरा। दीपक।
प्रखंड मुख्यालय के न्यू बीआरसी भवन में बुधवार को प्रखंड पंचायत समिति की बैठक आयोजित की गई। जिसमें ग्रामीण विकास कार्यों को को लेकर विभिन्न एजेंडों पर व्यापक चर्चा की गई।इस दौरान काफी गहमागहमी बनी रही।ग्रामीण विकास से जुड़ी हुई विभिन्न कार्य योजनाओं पर चर्चा की गई । ग्राम पंचायतों से ग्राम सभाओं में पारित कार्य प्रस्तावों की सम्पुष्टि की गई। वहीं सदन के सदस्यों के प्रस्ताव भी लिए गए। कार्यक्रम की बिंदुवार कार्यवाही के दौरान पंचायत समिति सदस्यों एवं मुखियों ने अपने कार्य क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न महत्वपूर्ण कार्यों के बारे में अपने-अपने कार्य प्रस्ताव दिए।सदस्यों ने बैठक के बाद बताया कि कार्यवाही के दौरान बड़गांव पंचायत के मुखिया मोहम्मद अब्दुल सत्तार अंसारी ने बंदरा सीओ राजीव रंजन पर दाखिल खारिज के मामले को अटकाने तथा इसके बदले भारी रिश्वतखोरी का आरोप लगाया।

इस दौरान सीओ ने इसका विरोध किया। इस बात को लेकर दोनों में काफी तीखी नोकझोंक और बहस हो गई। इसके बाद सीओ सदन से निकलकर चले गए। बैठक में शामिल बंदरा उपप्रमुख उमेश राय ने बताया कि बैठक में विभिन्न कार्य योजनाओं पर सदस्यों के प्रस्ताव लिए गए तथा सर्व सम्मत प्रस्ताव पारित किए गए।कुछ विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली पर सदस्यों ने नाराजगी भी जताई। वहीं बैठक की कार्यवाही से बाहर निकले गायघाट के आरजेडी विधायक निरंजन राय ने बताया कि बन्दरा में प्रखंड पंचायत समिति सदस्यों की बैठक आयोजित की गई थी। जिसमें ग्रामीण विकास को लेकर बीपीडीपी को लेकर विभिन्न बिंदुओं पर कार्य प्रस्ताव लिए गए। वही कुछ पदाधिकारियों के प्रति सदस्यों को नाराजगी थी। उनके प्रति कार्रवाई का प्रस्ताव लिया गया।इस दौरान ग्रामीण कार्यों को गति देने तथा विभिन्न अवरोधों पर कार्यवाई के निर्देश भी उनके स्तर से दिए गए है।

बैठक के बाद प्रखंड कार्यपालक पदाधिकारी सह प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रशांत कुमार ने बताया कि बैठक में विभिन्न कार्य योजनाओं पर सदस्यों के द्वारा दर्जनों प्रस्ताव पारित किए गए हैं।विभिन्न योजनाओं को मिलाकर करीब एक करोड़ से ज्यादा के प्रस्ताव लिए गए हैं। अध्यक्षता बन्दरा प्रखंड प्रमुख सोनी चौधरी कर रही थी। इस दौरान विभिन्न पंचायतों के मुखिया तथा पंचायत समिति सदस्यों के अलावा संबंधित विभाग के पदाधिकारी शामिल थे।इस दौरान पत्रकारों को सदन में जाने की इजाजत नहीं दी गयी।













