-BDO आमना वसी की पहल से तीन साल बाद परिवार से मिली संगीता, वीडियो कॉल पर मां-बेटी का भावुक मिलन
वारिसनगर/समस्तीपुर।दीपक। प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सुश्री आमना वसी की पहल और स्थानीय स्तर पर किए गए प्रयासों से करीब तीन वर्षों से अपने परिवार से बिछड़ी संगीता पासवान को आखिरकार अपने परिजनों से मिलाने में सफलता मिली। लंबे अरसे बाद अपनी मां को वीडियो कॉल पर देखकर संगीता भावुक होकर रो पड़ीं। वहीं बेटी को सामने देखकर मां की आंखों से भी आंसू छलक पड़े।
मामला तब सामने आया जब वाराणसी के पाण्डेयपुर स्थित मानसिक चिकित्सालय की मनोचिकित्सक डॉ. पालक खेमका ने वारिसनगर की BDO आमना वसी से संपर्क किया। उन्होंने अस्पताल में उपचाराधीन एक महिला को उसके परिवार से मिलाने में सहयोग का अनुरोध किया था। महिला अपने बारे में बहुत कम जानकारी याद कर पा रही थीं। वह केवल अपने भाई का नाम संजीव पासवान और मुख्शुदपुर, वारिसनगर, समस्तीपुर का नाम बता पा रही थीं।
BDO आमना वसी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल स्थानीय स्तर पर महिला के परिजनों की तलाश शुरू करवाई। पंचायत स्तर के कर्मियों और स्थानीय लोगों के सहयोग से महिला की पहचान संगीता पासवान के रूप में की गई और उनके परिवार का पता लगाया गया।

परिजनों की पहचान होने के बाद BDO की पहल पर वीडियो कॉल के माध्यम से संगीता की उनके परिवार से बातचीत कराई गई। जैसे ही संगीता ने स्क्रीन पर अपनी मां को देखा, वह भावुक होकर रोने लगीं। बेटी को वर्षों बाद सामने देखकर मां की आंखों से भी आंसू छलक पड़े। लंबे इंतजार के बाद मां-बेटी का यह भावुक मिलन वहां मौजूद लोगों के लिए भी बेहद मार्मिक क्षण बन गया।
करीब तीन वर्षों से परिवार से बिछड़ी संगीता को अपनों से मिलाने की यह पहल प्रशासनिक संवेदनशीलता और मानवीय सोच की मिसाल बन गई है। त्वरित पहल, स्थानीय लोगों के सहयोग और वारिसनगर प्रखंड प्रशासन एवं वाराणसी के मानसिक चिकित्सालय के बीच बेहतर समन्वय से एक परिवार को उसकी बिछड़ी बेटी से दोबारा जुड़ने का अवसर मिला।
इस पूरे प्रयास ने यह संदेश भी दिया कि प्रशासन केवल सरकारी योजनाओं और कार्यालयी कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर संवेदनशील पहल के जरिए लोगों के जीवन में खुशियां लौटाने का माध्यम भी बन सकता है।












