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महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी माह का शुभारंभ, राजभाषा की व्यावहारिक स्थिति पर हुई चर्चा

-महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में हिंदी माह का शुभारंभ, राजभाषा की व्यावहारिक स्थिति पर हुई चर्चा

मोतिहारी। राजन द्विवेदी। महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में सोमवार को राजभाषा प्रकोष्ठ एवं हिंदी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी माह का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का विषय “राजभाषा हिंदी की व्यावहारिक स्थिति” रहा। कार्यक्रम का आयोजन कुलपति प्रो. संजय श्रीवास्तव के संरक्षण में किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुई। राजभाषा अधिकारी डॉ. गोविंद प्रसाद वर्मा ने स्वागत भाषण देते हुए हिंदी की संवैधानिक स्थिति और राजभाषा के रूप में उसकी भूमिका पर प्रकाश डाला।

मुख्य वक्ता प्रो. अतुल कुमार शरण ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अंग्रेजी रोजगार की भाषा है तो हिंदी अभिमान की भाषा है। उन्होंने कहा कि चीन और जापान जैसे देश अपनी मातृभाषा को विशेष महत्व देते हैं, उसी तरह भारत में भी हिंदी को सम्मान और प्राथमिकता देने की आवश्यकता है।

अधिष्ठाता प्रो. सुजीत चौधरी ने हिंदी की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज शोधार्थियों की हिंदी भी पहले के स्कूली बच्चों जैसी नहीं रह गई है। उन्होंने हिंदी के अध्ययन, लेखन और व्यवहारिक प्रयोग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रो. राजेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए उसे अन्य भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के उपयोगी शब्दों को आत्मसात करना होगा। इससे हिंदी की अभिव्यक्ति क्षमता और व्यापक होगी।

कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी विकास कुमार ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. आशा मीणा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।