-उत्तर बिहार में 2 से 5 सितंबर तक बारिश के आसार, पश्चिम चंपारण में भारी बारिश की संभावना
समस्तीपुर। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के ग्रामीण कृषि मौसम सेवा एवं जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केंद्र ने 2 से 6 सितंबर 2026 के लिए मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार इस अवधि में उत्तर बिहार के अधिकांश हिस्सों में आसमान में हल्के से मध्यम बादल छाए रहने की संभावना है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, जबकि पश्चिम चंपारण में 4 और 5 सितंबर के दौरान मध्यम से भारी बारिश होने के आसार जताए गए हैं।
मौसम पूर्वानुमान के अनुसार इस दौरान अधिकतम तापमान 30 से 36 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता करीब 85 प्रतिशत, जबकि दोपहर में 60 से 65 प्रतिशत के आसपास रह सकती है। इस दौरान हवा मुख्य रूप से पूर्वी दिशा से 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है।
इससे पहले पिछले तीन दिनों के मौसम का आकलन करते हुए कृषि मौसम विभाग ने बताया कि पूसा में औसत अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह की सापेक्ष आर्द्रता 87 प्रतिशत और दोपहर में 83 प्रतिशत रही। हवा की औसत गति 10.8 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई। इस अवधि में 22.4 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि प्रतिदिन औसतन 3.2 मिलीमीटर वाष्पीकरण और 6.3 घंटे धूप दर्ज हुई।

मौसम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को फसलों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। धान की फसल में तना छेदक, पत्ती लपेटक और ब्राउन प्लांट हॉपर के प्रकोप पर नजर रखने को कहा गया है। खैरा रोग के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विशेषज्ञों की अनुशंसित दवाओं का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
मक्के की फसल में फॉल आर्मीवर्म की नियमित निगरानी करने तथा प्रकोप होने पर उचित कीटनाशक का छिड़काव करने की सलाह दी गई है। भिंडी में लीफ हॉपर के प्रकोप पर नजर रखने को कहा गया है। किसानों को सलाह दी गई है कि दवाओं का प्रयोग निर्धारित मात्रा और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही करें।
कृषि मौसम के लिहाज से फूलगोभी और पीता की बुआई के लिए भी यह अवधि अनुकूल बताई गई है। फूलगोभी की अनुशंसित किस्मों की बुआई तथा खेत की तैयारी के दौरान पर्याप्त मात्रा में अच्छी तरह सड़ी गोबर की खाद के इस्तेमाल की सलाह दी गई है। वहीं पीता की नर्सरी तैयार करने के लिए उपयुक्त बीज दर और बीज उपचार अपनाने को कहा गया है।
किसानों को सब्जी फसल के रूप में मूली की बुआई करने की भी सलाह दी गई है। उत्तर बिहार के लिए विभिन्न अनुशंसित किस्मों का इस्तेमाल करने तथा खेत में उचित दूरी पर बुआई करने की बात कही गई है।
पशुपालकों को भी मौसम को देखते हुए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। थनैला रोग की रोकथाम के लिए पशुओं के पैरों की साफ-सफाई, दुहने के बाद थनों की स्वच्छता और पशुशाला में उचित साफ-सफाई बनाए रखने पर जोर दिया गया है। दूध का पीएच स्तर जांचने तथा असामान्य स्थिति में पशु चिकित्सक की सलाह लेने की अपील की गई है।












