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तबादले के बाद भी पूर्व सीओ ने निपटाए 20 दाखिल-खारिज आवेदन

-तबादले के बाद भी पूर्व सीओ ने निपटाए 20 दाखिल-खारिज आवेदन

-जमीन का रकबा बढ़ाने का भी आरोप
-जांच में गंभीर अनियमितता

मुजफ्फरपुर। जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार लगातार नए प्रावधान लागू कर रही है, लेकिन राजस्व विभाग के स्तर पर ही नियमों की अनदेखी के मामले सामने आ रहे हैं। कुढ़नी के पूर्व अंचलाधिकारी अनिल कुमार संतोषी पर तबादले और प्रभार सौंपे जाने के बाद भी दाखिल-खारिज के आवेदनों का निपटारा करने का आरोप लगा है।

बताया गया कि पूर्व सीओ ने तबादले और प्रभार देने के बाद भी एक-दो नहीं, बल्कि 20 दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) आवेदनों का निपटारा कर दिया। इनमें से 18 आवेदनों को स्वीकृति दी गई, जबकि महज दो आवेदनों को अस्वीकृत किया गया। इन दोनों मामलों में आपत्ति दर्ज होने की बात सामने आई है।

जांच में यह भी सामने आया कि एक रैयत की जमीन के रकबे में भी कथित तौर पर गलत तरीके से वृद्धि की गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी कुमार गौरव ने तीन अधिकारियों की संयुक्त जांच टीम गठित की थी। जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में पूर्व सीओ अनिल कुमार संतोषी के कार्यों को गंभीर अनियमितता की श्रेणी में रखा है।

संयुक्त जांच रिपोर्ट में संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई है। रिपोर्ट सामने आने के बाद राजस्व विभाग में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जांच में यह सवाल भी उठाया गया है कि प्रभार सौंपे जाने के बाद पूर्व सीओ ने किन परिस्थितियों में दाखिल-खारिज के इतने मामलों का निपटारा किया।

अनिल कुमार संतोषी वर्तमान में पूर्वी चंपारण जिले के बंदोबस्त कार्यालय में सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

जमीन से जुड़े दाखिल-खारिज मामलों में इस तरह की अनियमितता सामने आने से राजस्व व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संबंधित अधिकारी के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।