-कृषि भूमि अधिग्रहण और भारत-अमेरिका कृषि समझौते के विरोध में किसानों का मार्च, मोदी-सम्राट चौधरी का पुतला फूंका
राजापाकर/संजय श्रीवास्तव। साम्राज्यवाद विरोधी राष्ट्रव्यापी आह्वान के तहत रविवार, 9 अगस्त 2026 को राजापाकर में अखिल भारतीय किसान महासभा के बैनर तले किसानों ने विभिन्न मांगों को लेकर विरोध मार्च निकाला। मार्च के बाद किसानों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का पुतला दहन कर सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया।
कार्यक्रम की शुरुआत राजापाकर उच्च विद्यालय परिसर स्थित महान स्वतंत्रता सेनानी बच्चन शर्मा की प्रतिमा पर माल्यार्पण के साथ हुई। इसके बाद किसानों ने राजापाकर उच्च विद्यालय चौक से शनिचर हाट तक विरोध मार्च निकाला।
अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव सुमन कुमार ने कहा कि कृषि संकट से जूझ रहे किसानों को राहत देने के बजाय सरकारें विकास के नाम पर कृषि भूमि को गैर-कृषि कार्यों के लिए इस्तेमाल करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने किसानों को प्रभावित करने वाले भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौते को रद्द करने की मांग की।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में प्रस्तावित 12 सैटेलाइट टाउनशिप परियोजनाओं और लैंड पूलिंग नीति के माध्यम से बड़ी मात्रा में कृषि भूमि कॉरपोरेट हितों के लिए लेने की कोशिश की जा रही है। साथ ही पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के कारण किसानों की उपजाऊ जमीन और बगीचों के प्रभावित होने की आशंका जताई।
संगठन के प्रखंड अध्यक्ष राम बहादुर सिंह ने कहा कि महंगे खाद, बीज, डीजल और कीटनाशक के कारण खेती किसानों के लिए घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने खाद की कालाबाजारी पर रोक लगाने तथा किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी उपलब्ध कराने की मांग की।
डॉ. भिखारी प्रसाद सिंह ने सभी फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी देने तथा C2+50 प्रतिशत के फार्मूले के आधार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करने की मांग की। उन्होंने किसानों को मिलने वाली सम्मान निधि बढ़ाकर कम से कम 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने की भी मांग उठाई।
सभा को किसान नेता बृजेंद्र प्रसाद सिंह, रामप्रवेश सिंह, मालती देवी, मंती देवी, जुलम साहनी, मंटू कुमार, प्रेम मांझी, फकीरा राय, सुरेश सिंह, राम इकबाल सिंह, रामबाबू प्रसाद सिंह, महेश सिंह और विनोद राम सहित अन्य किसान नेताओं ने संबोधित किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।












