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पटना: अत्याधुनिक ड्रग वेयर हाउस तैयार, फिर भी संचालन का इंतजार; दवाएं अब भी पुराने परिसर में हो रहीं स्टोर

पटना: अत्याधुनिक ड्रग वेयर हाउस तैयार, फिर भी संचालन का इंतजार; दवाएं अब भी पुराने परिसर में हो रहीं स्टोर

पटना। सरकारी अस्पतालों में दवाओं के सुरक्षित भंडारण और समय पर आपूर्ति की व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए गुरु गोविंद सिंह अस्पताल परिसर में बिहार मेडिकल सर्विसेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीएमएसआईसीएल) द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ड्रग वेयर हाउस पूरी तरह तैयार है। इसके बावजूद इसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। हालात यह हैं कि दवाओं की नई खेप आज भी जिला स्वास्थ्य समिति परिसर में ही उतारी जा रही है, जहां जगह की कमी के कारण दवाओं के कार्टन जमीन पर रखने पड़ रहे हैं।
बीएमएसआईसीएल के उपमहाप्रबंधक (परियोजना) ने 3 जुलाई 2026 को सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, पटना को पत्र भेजकर भवन का हस्तांतरण लेने और जल्द संचालन शुरू कराने का अनुरोध किया था। पत्र के अनुसार वेयर हाउस का निर्माण स्वीकृत मानकों के अनुरूप पूरा हो चुका है और अधिकांश आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध करा दी गई हैं। केवल स्थायी विद्युत कनेक्शन की प्रक्रिया अंतिम चरण में है।

आधुनिक सुविधाओं से लैस है वेयर हाउस:

नए ड्रग वेयर हाउस में वैज्ञानिक तरीके से दवाओं के सुरक्षित भंडारण के लिए मॉड्यूलर कोल्ड रूम, स्प्लिट एयर कंडीशनर, फायर हाइड्रेंट सिस्टम, 17 अग्निशामक यंत्र, 85 स्टोरेज रैक, सीसीटीवी निगरानी, एलईडी लाइटिंग और अन्य आवश्यक सुरक्षा व विद्युत सुविधाएं उपलब्ध हैं। इसके शुरू होने से तापमान नियंत्रित वातावरण में दवाओं की गुणवत्ता लंबे समय तक सुरक्षित रखी जा सकेगी।

गर्दनीबाग वेयर हाउस पर कम होगा दबाव:

वर्तमान में पटना जिले की सरकारी दवाओं का भंडारण गर्दनीबाग अस्पताल परिसर स्थित वेयर हाउस में किया जाता है। लंबे समय से वहां जगह की कमी के कारण दवाओं के कार्टन फर्श पर रखने पड़ते हैं, जिससे नमी और पानी के कारण दवाओं के खराब होने का खतरा बना रहता है। अधिकारियों का मानना है कि नया वेयर हाउस चालू होने के बाद यह समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी और जिले के अस्पतालों तक दवाओं की आपूर्ति अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सकेगी।

सिविल सर्जन का दावा:

सिविल सर्जन डॉ. योगेन्द्र प्रसाद मंडल ने कहा कि “एक सप्ताह के भीतर ड्रग वेयर हाउस का संचालन शुरू कर दिया जाएगा। इसी केंद्र से पूरे पटना जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों को दवाओं की आपूर्ति की जाएगी।”

दावे और जमीनी हकीकत में अंतर:

हालांकि, सिविल सर्जन के दावे के बावजूद जमीनी स्थिति अभी अलग नजर आ रही है। दवाओं की खेप अब भी जिला स्वास्थ्य समिति परिसर में ही उतारी जा रही है और पर्याप्त भंडारण क्षमता नहीं होने के कारण कई कार्टन जमीन पर रखे जा रहे हैं। इससे दवाओं के खराब होने की आशंका बनी हुई है।
अब स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सिविल सर्जन द्वारा किया गया एक सप्ताह में संचालन शुरू करने का दावा तय समय सीमा में धरातल पर उतरता है या फिर यह परियोजना भी लंबे इंतजार का शिकार बनकर रह जाएगी।