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बिहार को मिलने जा रहा सबसे लंबा गंगा पुल, अगले महीने शुरू होगी कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन परियोजना

-बिहार को मिलने जा रहा सबसे लंबा गंगा पुल, अगले महीने शुरू होगी कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन परियोजना

पटना। बिहार के विकास की तस्वीर बदलने वाली बहुप्रतीक्षित कच्ची दरगाह-बिदुपुर 6-लेन गंगा पुल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। करीब 9.75 किलोमीटर लंबा यह पुल अगले महीने आम लोगों के लिए खोल दिया जाएगा। इसके शुरू होते ही उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुगम और सुविधाजनक हो जाएगा।
करीब 4,988 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का 98 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। निर्माण एजेंसियां शेष तकनीकी और फिनिशिंग कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने में जुटी हैं। लक्ष्य है कि जुलाई के पहले सप्ताह तक पुल का परिचालन शुरू कर दिया जाए, जिससे मानसून के दौरान राघोपुर दियारा समेत आसपास के लाखों लोगों को बड़ी राहत मिल सके।
कुल 19.76 किलोमीटर लंबी परियोजना में लगभग 10 किलोमीटर एप्रोच रोड और 9.75 किलोमीटर लंबा मुख्य पुल शामिल है। गंगा नदी पर बनने वाला यह बिहार का सबसे लंबा पुल होगा, जिसे राज्य की यातायात व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली परियोजना माना जा रहा है।
वर्तमान में सीमांचल, समस्तीपुर, वैशाली और हाजीपुर क्षेत्र से पटना आने-जाने वाले लोगों को अक्सर महात्मा गांधी सेतु पर भारी जाम का सामना करना पड़ता है। कई बार यात्रियों को घंटों का समय लग जाता है। लेकिन नए पुल के चालू होने के बाद यह यात्रा महज 15 से 20 मिनट में पूरी की जा सकेगी।


छह लेन वाले इस आधुनिक पुल पर वाहन 100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे। इससे माल ढुलाई और यात्री परिवहन दोनों को बड़ी सुविधा मिलेगी। साथ ही महात्मा गांधी सेतु पर वर्षों से बने ट्रैफिक दबाव में भी उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
यह परियोजना एनएच-30 (पटना-बख्तियारपुर बाईपास) को सीधे एनएच-103 (बिदुपुर) से जोड़ेगी। इसके अलावा प्रस्तावित पटना रिंग रोड और आमस-दरभंगा एक्सप्रेसवे से भी इसका सीधा संपर्क होगा। इससे उत्तर बिहार, मिथिलांचल और सीमांचल क्षेत्र के लोगों को बेहतर कनेक्टिविटी का लाभ मिलेगा।
परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक द्वारा लगभग 3,396 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है, जबकि भूमि अधिग्रहण पर करीब 697 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। पुल का निर्माण डेवू इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन तथा लार्सन एंड टुब्रो के संयुक्त प्रयास से किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पुल केवल गंगा पर बना एक नया मार्ग नहीं, बल्कि बिहार में विकास, व्यापार, निवेश और तेज आवागमन का नया द्वार साबित होगा। इसके शुरू होते ही राज्य के सड़क नेटवर्क को नई मजबूती मिलेगी और लाखों लोगों की यात्रा आसान हो जाएगी।