-भारत-नेपाल सीमा विवाद पर प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का बयान, नेपाल में छिड़ी नई बहस
जनकपुरधाम/मिश्री लाल मधुकर। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भारत-नेपाल सीमा विवाद और भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए स्वीकार किया है कि अतिक्रमण की समस्या दोनों देशों के साथ जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विवादों का समाधान कूटनीतिक स्तर पर आपसी बातचीत और संवाद के माध्यम से निकाला जा सकता है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह का यह बयान ऐसे समय में आया है जब लिम्पियाधुरा, कालापानी और लिपुलेक क्षेत्र को लेकर नेपाल में लंबे समय से राजनीतिक बहस जारी है। नेपाल इन क्षेत्रों पर अपना दावा करता रहा है, जबकि इस मुद्दे को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली भी कई बार सार्वजनिक रूप से अपनी बात रख चुके हैं।
प्रधानमंत्री शाह ने इससे पहले भी इन क्षेत्रों पर नेपाल के अधिकार की बात कही थी और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी इस मुद्दे को उठाते रहे हैं। हालांकि, रविवार को संसद में दिए गए उनके बयान ने नई राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। उन्होंने कहा कि सीमा और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दे दोनों देशों के लिए चिंता का विषय हैं और इनका समाधान टेबल टॉक तथा कूटनीतिक वार्ता के जरिए किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद नेपाल में राजनीतिक और बौद्धिक जगत दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। कई राजनीतिक नेताओं, बुद्धिजीवियों और पत्रकारों ने उनके वक्तव्य की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि सरकार भारत के प्रति नरम रुख अपना रही है। आलोचकों का कहना है कि नेपाल को अपने दावे वाले क्षेत्रों पर अधिक मजबूती से अपनी बात रखनी चाहिए।
वहीं, एक वर्ग ने प्रधानमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दों का समाधान केवल संवाद और आपसी सहमति से ही संभव है। समर्थकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच बेहतर कूटनीतिक संबंध बनाए रखते हुए विवादों का शांतिपूर्ण समाधान तलाशना समय की मांग है।
प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह के इस बयान ने नेपाल की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसका असर आने वाले दिनों में भारत-नेपाल संबंधों और नेपाल की आंतरिक राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है।














