-10 साल से अधूरा जयप्रकाश डैम, 12 गांवों के किसान सिंचाई संकट से बेहाल
चतरा। जिले के प्रतापपुर प्रखंड अंतर्गत यादव नगर टंडवा स्थित जयप्रकाश डैम पिछले एक दशक से बदहाली का शिकार बना हुआ है। वर्ष 2016 में डैम टूटने के बाद से अब तक न तो इसका पुनर्निर्माण हुआ और न ही मरम्मत कार्य शुरू हो सका है। इसके चलते क्षेत्र के किसानों को गंभीर सिंचाई संकट का सामना करना पड़ रहा है और हजारों एकड़ कृषि भूमि बंजर होने की कगार पर पहुंच गई है।
कभी यह डैम प्रतापपुर क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता था। इसके जरिए आसपास के करीब 12 गांवों की हजारों एकड़ जमीन सिंचित होती थी, जहां धान, गेहूं, दलहन और तिलहन की खेती बड़े पैमाने पर होती थी। लेकिन डैम टूटने के बाद खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर हो गई है। समय पर बारिश नहीं होने से किसानों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं।
स्थानीय किसानों के अनुसार वर्ष 2013-14 में करोड़ों रुपये खर्च कर डैम की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठे और महज कुछ वर्षों में ही डैम फिर टूट गया। इसके बाद कई बार विभागीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार की, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई।

ग्रामीणों का आरोप है कि हर चुनाव में जनप्रतिनिधि इस डैम को मुद्दा बनाकर वादे करते हैं। मंत्री, सांसद और विधायक कई बार मंच से इसके निर्माण का आश्वासन दे चुके हैं, लेकिन आज तक यह सिर्फ घोषणाओं तक ही सीमित रहा है।
डैम के जर्जर होने का असर सिर्फ खेती पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि इलाके के जलस्तर पर भी दिख रहा है। पहले डैम में पानी रहने से आसपास के कुएं और चापाकल सालभर भरे रहते थे, लेकिन अब गर्मी के दिनों में जल संकट भी गहराने लगा है।
किसानों और ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द डैम का पुनर्निर्माण या मरम्मत कराया जाए। उनका कहना है कि यदि इस बार भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।











