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20 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण, पटना–दिल्ली में सियासी हलचल तेज़; डिप्टी CM की कुर्सी पर सबसे बड़ी पेचीदगी

-20 नवंबर को नई सरकार का शपथ ग्रहण, पटना–दिल्ली में सियासी हलचल तेज़; डिप्टी CM की कुर्सी पर सबसे बड़ी पेचीदगी

पटना। दीपक कुमार तिवारी।

बिहार की राजनीति इन दिनों अपने चरम पर है। 20 नवंबर को नई सरकार के शपथ ग्रहण की तैयारियाँ ज़ोरों पर हैं और पटना के गांधी मैदान में मंच सजने लगा है। इधर राजधानी में व्यवस्थाओं की तैयारियाँ चल रही हैं, उधर दिल्ली में आज बीजेपी और एनडीए विधायक दल की बेहद अहम बैठक होने जा रही है। माना जा रहा है कि इस बैठक में सरकार का अंतिम खाका तैयार हो जाएगा—कौन उपमुख्यमंत्री बनेगा, कौन मंत्री बनेगा और कौन विधायक दल का नेता चुना जाएगा।

डिप्टी CM पर पेचीदगी गहराई, महिला और अतिपिछड़ा वर्ग से एक-एक नाम की चर्चा:

बीजेपी के भीतर इस बार दो डिप्टी सीएम बनाए जाने की चर्चा ज़ोरों पर है—एक महिला और एक अतिपिछड़ा वर्ग से। मौजूदा डिप्टी CM सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा की पुनर्नियुक्ति को लेकर पार्टी के भीतर अलग-अलग मत हैं। रविवार रात विजय सिन्हा का संघ मुख्यालय जाकर वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाक़ात करना राजनीतिक गलियारों में नई हलचल का कारण बना है। वहीं सम्राट चौधरी लगातार नीतीश कुमार और बीजेपी नेतृत्व से तालमेल साधते नज़र आ रहे हैं।

बैठक में 36 मंत्रियों के फार्मूले पर भी अंतिम मुहर लग सकती है। बीजेपी की ओर से 16 मंत्री, जदयू से 15, LJP(R) से 3 और हम व रालोमो से एक-एक मंत्री बनाए जाने की रूपरेखा तैयार है।

नीतीश कुमार ने विधानसभा भंग करने का भेजा प्रस्ताव:

सोमवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान से मिलकर विधानसभा भंग करने का पत्र सौंपा। इसके पहले आख़िरी कैबिनेट मीटिंग में भी 19 नवंबर को विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित हुआ। केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने कहा कि नई कैबिनेट में 35–36 मंत्री होंगे और 20 नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शपथ ग्रहण समारोह में मौजूद रहेंगे।

सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार के साथ 18 मंत्री शपथ ले सकते हैं। डिप्टी CM की रेस में सम्राट चौधरी, मंगल पांडे और रामकृपाल यादव के नाम प्रमुख हैं, जबकि LJP(R) भी अपने कोटे से एक पद पर दावेदारी जता रही है।

जदयू के 10 पुराने चेहरे लौट सकते हैं:

पिछली सरकार में जदयू कोटे से बने 13 मंत्रियों में से 10 की वापसी लगभग तय मानी जा रही है। इस बार भी जदयू मजबूत भूमिका में दिखाई दे रही है, जबकि 2025 चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद बीजेपी को सहयोगियों के समीकरण साधने में विशेष रणनीति अपनानी पड़ रही है।

हर फैसला अहम, पूरा बिहार टकटकी लगाए:

कुल मिलाकर, बिहार की सियासत इस समय एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर खड़ी है। 19 नवंबर की विधायक दल की बैठक सबसे निर्णायक साबित होगी—यहीं तय होगा कि राज्य का नया सत्ता समीकरण कैसा दिखेगा और अगले पांच वर्षों तक सत्ता की बागडोर किन हाथों में होगी।