-बिहार चुनाव 2025: नतीजों से पहले सियासी चौसर बिछी
— महागठबंधन ने बनाया “पोस्ट रिजल्ट प्लान”, विधायकों को शिफ्ट करने की तैयारी
पटना।दीपक कुमार तिवारी।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के मतदान संपन्न हो चुके हैं और अब पूरा राज्य 14 नवंबर के नतीजों का इंतजार कर रहा है। लेकिन नतीजे आने से पहले ही राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) ने संभावित राजनीतिक अस्थिरता और “हॉर्स ट्रेडिंग” की आशंका को देखते हुए पोस्ट रिजल्ट प्लान तैयार कर लिया है।
गठबंधन के अंदरखाने तय हुआ है कि अगर सरकार बनाने की स्थिति बनी और किसी तरह के दबाव या प्रलोभन का खतरा दिखा, तो विधायकों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जाएगा। आरजेडी, कांग्रेस और वीआईपी ने इस दिशा में अपनी-अपनी रणनीति बना ली है।
🔹 आरजेडी की रणनीति — “विधायक रहेंगे पटना में सुरक्षित”
सूत्रों के अनुसार, राजद नेतृत्व ने निर्देश दिया है कि नतीजों के तुरंत बाद सभी विजेता विधायक पटना में एक ही स्थान पर ठहराए जाएंगे। पार्टी का मकसद किसी भी तरह की तोड़फोड़ या संपर्क से बचाव करना है। तेजस्वी यादव खुद अपने विधायकों के संपर्क में रहेंगे और होटल या गेस्ट हाउस में उनके ठहरने की व्यवस्था की जाएगी। पार्टी ने साफ कहा है —
> “इस बार कोई लापरवाही नहीं होगी, हर विधायक पार्टी की निगरानी में रहेगा जब तक सरकार गठन पूरा नहीं हो जाता।”
🔹 कांग्रेस की योजना — “विधायकों को भेजा जाएगा दक्षिण भारत”
इंडिया गठबंधन की सहयोगी कांग्रेस पार्टी ने अपने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया है कि वे जीत के बाद विधायकों को तत्काल पटना पहुंचाकर उनकी निगरानी करें। पार्टी सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस अपने विधायकों को कर्नाटक या तेलंगाना भेजने की तैयारी में है, जहां उसकी सरकारें हैं।
इस कदम का उद्देश्य है कि क्रॉस वोटिंग या पार्टी तोड़ने की कोशिश को नाकाम किया जा सके। कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि छोटे दलों के विधायकों की निगरानी की जिम्मेदारी भी वह उठा सकती है, ताकि गठबंधन की एकजुटता बनी रहे।

🔹 वीआईपी का प्लान — “विधायक जाएंगे बंगाल”
विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) प्रमुख मुकेश सहनी ने भी अपनी अलग रणनीति तैयार की है। बताया जा रहा है कि नतीजे घोषित होते ही वे अपने विधायकों को विशेष विमान से बंगाल भेजेंगे। चूंकि बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है, इसलिए वहां सुरक्षा सुनिश्चित मानी जा रही है। वीआईपी ने इस संबंध में पहले से समन्वय स्थापित कर लिया है।
🔹 एनडीए में आत्मविश्वास, महागठबंधन में सतर्कता:
वहीं दूसरी ओर एनडीए खेमे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आत्मविश्वास से भरे दिख रहे हैं। उनका कहना है कि जनता ने “सुशासन” पर भरोसा जताया है। जबकि तेजस्वी यादव का दावा है कि बिहार अब “बदलाव के लिए तैयार” है और वे इस बार मुख्यमंत्री पद संभालने जा रहे हैं।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसी भी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला, तो “पोस्ट-पोल पॉलिटिक्स” यानी बाद की जोड़-तोड़ की स्थिति बन सकती है। इसी आशंका के चलते हर दल अपने विधायकों को सुरक्षित रखने की जुगत में है।
🔹 रिकॉर्ड वोटिंग से बढ़ी उम्मीदें:
दूसरे और अंतिम चरण में 67.14% मतदान दर्ज किया गया — जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। पहले चरण में यह 65.09% रहा था। विश्लेषकों के मुताबिक, यह उच्च मतदान सत्ता विरोधी लहर या परिवर्तन की इच्छा का संकेत भी हो सकता है।
जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा —
> “यह वोटिंग प्रतिशत बताता है कि बिहार ने अब नया विकल्प तलाश लिया है।”
🔹 नतीजों से पहले सियासी चौसर तैयार:
बिहार में अब केवल नतीजों की नहीं, बल्कि विधायकों की सुरक्षा और सत्ता की रणनीति की भी जंग शुरू हो चुकी है। आरजेडी अपने विधायकों को पटना में रोकेगी, कांग्रेस उन्हें दक्षिण भेजेगी और वीआईपी बंगाल भेजने की तैयारी में है।
राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है —
> “इस बार लड़ाई केवल वोट की नहीं, बल्कि विधायकों को बचाने की भी है।”
अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर हैं — जब यह तय होगा कि नीतीश कुमार की सत्ता बरकरार रहेगी या तेजस्वी यादव का सपना पूरा होगा।
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