-पितरों को नमन : प्रेरणा का अनन्त स्रोत
वो कल थे, तभी तो हम आज हैं।
उनकी ही जीवनधारा का अंश होकर हम इस धरती पर अस्तित्व में आए हैं। माता-पिता से लेकर पूर्वजों तक की यह अनवरत श्रृंखला हमें न केवल जीवन देती है बल्कि हमारी संस्कृति, संस्कार और मूल्य भी प्रदान करती है।
हमारे पूर्वजों ने जो मार्गदर्शन, जीवन-पद्धति और मूल्य स्थापित किए, वही आज हमारी पहचान और अस्तित्व की नींव बने हुए हैं। यद्यपि हममें से अधिकांश ने अपने सभी पुरखों को देखा नहीं, फिर भी उनके आशीर्वाद की छाया हमेशा हमारे साथ रहती है।
पूर्वज हमें प्रत्यक्ष दिखाई न दें, लेकिन उनकी निगाहें, उनका संरक्षण और उनकी छाया हमारे जीवन को हर क्षण प्रभावित करती है। हमारी सफलता पर वे प्रसन्न होते हैं और हमारे पतन पर दुःखी भी। यही कारण है कि जब भी हम संघर्ष में डगमगाने लगते हैं, तो अदृश्य रूप से वही हमें सहारा देते हैं।

आज हम अनेक दिवस मनाते हैं – मित्रता दिवस, प्रेम दिवस, शिक्षक दिवस इत्यादि। तो क्यों न हम उन पितरों को भी स्मरण करें, जिनकी बदौलत हम इस संसार में हैं? उनका आभार व्यक्त करें, उनसे क्षमा माँगें और उनके आशीर्वाद को स्वीकार करें।
पितरों की वंदना करना केवल परंपरा नहीं, बल्कि आत्मा की गहराइयों से जुड़ने का अवसर है। यह हमें यह एहसास कराता है कि हम अकेले नहीं, बल्कि एक महान परंपरा और संस्कारों की विरासत के ध्वजवाहक हैं।
आइए, आज हम सब मिलकर यह संकल्प लें कि हम पितरों की दी हुई संस्कृति, गुण और मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे। उनके आदर्शों को आगे बढ़ाकर ही हम सच्चे अर्थों में उन्हें नमन कर पाएंगे।
🌹 सर्व पितृ पितरों को शत-शत नमन। 🌹🙏
आलेख: दीपक कुमार तिवारी।












