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निराला निकेतन में काव्य गोष्ठी का आयोजन, वरिष्ठ कवियों ने बिखेरे शब्दों के मोती

निराला निकेतन में काव्य गोष्ठी का आयोजन, वरिष्ठ कवियों ने बिखेरे शब्दों के मोती

मुजफ्फरपुर। संवाददाता।

निराला निकेतन में महावाणी स्मरण के तत्वावधान में प्रत्येक माह की तरह इस बार भी काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में शहर के वरिष्ठ कवि, शायर और साहित्यकारों ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं का पाठ किया।

कार्यक्रम की शुरुआत अंजनी कुमार पाठक ने शास्त्री जी के गीतों को गाकर की, जिसके बाद काव्य की लहर पूरे माहौल में फैल गई। इसके बाद आलोक कुमार अभिषेक ने जात-पंथ के भेदभाव पर कटाक्ष करते हुए सामाजिक मुद्दों पर आधारित कविता का पाठ किया। रामवृक्ष राम चकपुरी ने राजनीतिज्ञों की राजनीति को लेकर अपनी कविता ‘राजनीति बनी-बनाई जागीरें’ सुनाई।

आलोक शर्मा ने बेटियों के सम्मान पर आधारित अपनी कविता ‘बेटियों के लिए भी सर उठाया करो’ से श्रोताओं को भावुक कर दिया। नरेन्द्र मिश्र ने ‘मन करता है कुछ गाने का, खाली घर की निरवता में’ जैसी गहन अनुभूति को व्यक्त किया।

 

काव्य गोष्ठी में अंजनी कुमार पाठक ने भी अपनी प्रेरणादायक कविता ‘जब तक जीवन नेकी है करना’ सुनाई, जबकि रघुनाथ मोहब्बतपुरिया ने अपनी गीतात्मक प्रस्तुति ‘छएला मरदवा दुआर शोभेला’ से समां बांध दिया। अरुण कुमार तुलसी ने ‘रावण बनना कहाँ आसान था’ के माध्यम से अपने अनूठे दृष्टिकोण को प्रस्तुत किया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ कवि सत्येन्द्र कुमार सत्येन ने की, जबकि संचालन डा. हरि किशोर प्रसाद सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन उमेश राज द्वारा किया गया।