#कईसन_लिखले_करम_में_विधाता
अनूप।पटना।
भिखारी ठाकुर का नाम आपने सुना होगा उनके गाने भी सुने होंगे भोजपुरी में एक अलग विधा की गायकी और लोगों के बीच ज्वलंत मुद्दों को नाटक के रूप में प्रस्तुतीकरण के कारण आज पूरी दुनिया में भोजपुरी के शेक्सपियर के रूप में उन्हें जाना जाता है 18 दिसंबर भिखारी ठाकुर की पुण्यतिथि है इस दिन कई सारे राजकीय और गैर राजकीय समारोह आयोजित किए जाते हैं होने भी चाहिए क्योंकि भोजपुरी में जो एक बड़ी लकीर भिखारी ठाकुर खींच कर गए उसे कोई पार नहीं कर सका आज उसी लकीर को पकड़कर कई सारी संस्थाएं कई सारे लोग नाम और दाम कमा रहे हैं पर आज भी भिखारी ठाकुर का परिवार भिखारी ही बना हुआ है कुतुबपुर आज भी उसी तरह पिछड़ा है उनके परिजनों की कोई सुध लेने वाला है और ना ही उनके गांव की।भिखारी ठाकुर के विदेशिया शैली को लेकर कई सारे लोग अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे उसके बाद खुद को भिखारी ठाकुर का सबसे बड़ा अनुयायी बताकर सरकार की करोड़ों की अनुदान राशि चट कर गए बाद में उनके चेले ने चखा बच गया तो कुछ दाएं बाएं के लोगों को भी मिला पर जो कुछ मिलना चाहिए था भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के जीवित सदस्यों को मृत सदस्यों के परिजनों को खुद उनके परिजनों को वह नहीं मिला बात थोड़ी कड़वी है पर सच है। किसी भी ऐसे महापुरुष की पुण्यतिथि और जन्मतिथि मनाने भर से आप उसकी आत्मा को शांति नहीं प्रदान कर सकते बड़ी आदम कद प्रतिमा लगा देने से उसके आदर्श लोगों तक नहीं पहुंच पाएंगे अगर सही मायने में ऐसी विभूतियों को श्रद्धांजलि देनी है तो उनके परिजनों की भी सुध लेनी जरूरी है तस्वीर में मेरे साथ भोजपुरी की लोकप्रिय गायिका कल्पना पटवारी है कल्पना मूल रूप से असम की रहने वाली है मुंबई गाना गाने गई थी भोजपुरी भाषा अच्छी लगी ब्रेक मिला सुपरहिट हो गई और भोजपुरी की स्वर कोकिला बन गई आवाज अच्छी है और भिखारी ठाकुर को पुनर्जीवित करने का श्रेय भी इनको जाता है पूरी भिखारी ग्रंथावली को इन्होंने अपने स्वर में सजाया तस्वीर उस समय की है जब एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित हुआ और सूत्रधार की भूमिका में मैं मंच पर था साथ थे भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के सदस्य रहे और बाद में खुद की नाच मंडली चलाने वाले 115 वर्षीय रामज्ञा राम जिनकी सुध लेने वाला कोई नहीं थोड़ी बहुत आर्थिक मदद कल्पना पटवारी कर देती हैं तीन वर्ष पूर्व भिखारी ठाकुर के नाच मंडली के सदस्य रहे रामचंद्र माझी को पद्मश्री पुरस्कार मिला। जिसके लिए छपरा के एक जिद्दी युवक अपनी जान तक लगा दी। नीचे से लेकर मंत्रालयों तक का दरवाजा खटखटाया और बताया कि भिखारी ठाकुर की आत्मा वाले रामचंद्र माझी जीवित है।इन्हें भी सम्मान मिलना चाहिए और सम्मान मिला इसी वर्ष रामचंद्र जी का निधन हो गया।

अंतिम वक्त काफी दुखद गुजरा। दाने-दाने के मोहताज थे। पोते पुत्रों के पास रोजगार नहीं पद्मश्री का तमगा घर में कहीं कोने में पड़ा होगा इसे कई पीढ़ियों के लोग याद करेंगे उनके दादा परदादा भिखारी ठाकुर के साथ उनके नाच मंडली में काम करते थे और उनके योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री दिया सम्मान सम्मान होता है। उसी छपरा के एक प्रगतिशील सोच वाले युवा विधायक जितेंद्र राय बिहार के कला संस्कृति मंत्री बने है।काफी संजीदा है और इन सभी छोटी-छोटी टुकड़ों में बिखरे दुख दर्द से भी वाकिफ है आशा है कि शायद उनके कार्यकाल में कुछ मरहम भिखारी ठाकुर के परिजनों के दुखते रिश्ते जख्मों पर जरूर लग जाए यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।















